द इंस्टिट्यूट फोर डिफेंस स्टडीज एंड एनलिसिस के निदेशक लक्ष्मण कुमार बहेरा कहते हैं कि भारत की वायु सेना की तुलना में पाकिस्तान की वायु सेना बहुत कमजोर है। बहेरा कहते हैं कि पाकिस्तान की वायुसेना ऐसे हमलों का जवाब देने में सक्षम नहीं है। भारतीय वायु सेना की तैयारी इतनी मुकम्मल थी कि पाकिस्तान के लिए अंदाजा लगाना आसान नहीं था। भारत ने बहुत कम समय में इस हमले को अंजाम दिया है। पाकिस्तान का एयर सर्विलांस सिस्टम और जैमर बहुत ही लचर है। इतने कम समय के हमले को संभालना पाकिस्तान के मौजूदा एयर सर्विलांस के बस की बात नहीं है।
भारत की मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि भारत के 12 मिराज लड़ाकू विमान सीमा पार हुए थे और 21 मिनट के भीतर हमले को अंजाम देकर वापस लौट आए। कहा जा रहा है कि पिछले पांच दशकों में 1971 के युद्ध के बाद भारत ने पहली बार सीमा पार हमला किया है। अप्रैल 2000 में भारतीय एयरफोर्स ने रूस से दो A-50 AWAC (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल) एयरक्राफ्ट खरीदे थे। यह रेडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के लिए काफी अहम था।
भारत ने इसे जब खरीदा था तभी पाकिस्तान के रिटायर्ड एयर मार्शल अयाज अहमद खान ने पाकिस्तान के लिए खतरनाक बताया था। अयाज खान ने कहा था कि भारत इस सिस्टम से पाकिस्तान के भीतर और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की जासूसी करने में सक्षम हो गया है। अयाज खान ने चेताया था कि इंडियन एयर फोर्स को इस सिस्टम से पाकिस्तानी एयर फोर्स के बेस की गतिविधियां पहले ही पता चल जाएंगी।
खान ने कहा था, A-50 AWAC से भारत को पहले ही पता चल जाएगा कि पाकिस्तानी रेडार सिस्टम कहां लगा है, मिसाइल की तैनाती कहां है और पाकिस्तानी एयर फोर्स कौन सी गतिविधियां कर रहा है। रूस में बना A-50 AWAC पाकिस्तान की वायुसेना की सभी गतिविधियां पता करने में सक्षम है और पाकिस्तान के लिए चिंताजनक है।
पाकिस्तान में डिफेंस से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट डिफेंस डॉट पीके की एक रिपोर्ट का कहना है कि पाकिस्तान के एयरबोर्न रडार पुराने पड़ गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपने एयरबोर्न सर्विलांस पर काफी खर्च किया है। हालांकि पाकिस्तान ने भी खूद को अपग्रेड करने की कोशिश की है लेकिन भारत बहुत विशाल देश है इसलिए पाकिस्तान के सर्विलांस सिस्टम के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। अयाज खान ने अपनी रिपोर्ट ने कहा है कि भारत के पास रूस से एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल आने के बाद पाकिस्तानी एयर फोर्स का डिफेंस सिस्टम काफी पीछे छूट गया है।
एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल टेक्नॉलजी यानी दूसरे देश के एयरफोर्स की गतिविधियों पर नजर रखने वाली टेक्नोलॉजी में अमरीका सबसे आगे है। पाकिस्तान रक्षा मामलों में अब लगातार चीन पर निर्भर हो रहा है। लेकिन एयर सर्विलांस के मामले में चीन से पाकिस्तान को बहुत मदद नहीं मिली है। अमरीका की तरफ से पाकिस्तान को मिलने वाली रक्षा मदद और रक्षा तकनीक बिल्कुल बंद हो गई है।
ओबामा प्रशासन के आखिर के कुछ महीनों में ही अमरीकी कांग्रेस ने एफ-16 लड़ाकू विमान पाकिस्तान को बेचने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद एफ-16 फाइटर जेट से ध्यान हटाकर चीन के साथ मिलकर जेएफ-17 फाइटर जेट विकसित करने पर काम शुरू किया था। अमरीकी कांग्रेस ने एफ-16 को लेकर पाकिस्तान के साथ कड़ा रुख़ अपनाया तो पाकिस्तान ने सैन्य साजो सामान की तलाश दूसरे पार्टनर में शुरू कर दी थी।
इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार अमरीका और पाकिस्तान के बीच का हथियार सौदा एक अरब डॉलर से फिसलकर पिछले साल 2।1 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि इस दौरान चीन और पाकिस्तान के बीच भी हथियारों के सौदे के आकार में गिरावट आई लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। चीन के साथ पाकिस्तान का हथियार सौदा 74।7 करोड़ डॉलर से 51।4 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही पाकिस्तान को हथियार बेचने के मामले में चीन पहले नंबर पर रहा।
अमरीकी डिफेंस वेबसाइट ग्लोबल फायर पावर के अनुसार पाकिस्तान के पास कुल एयरक्राफ्ट 1281 हैं जबकि भारत के पास 2185 हैं। लक्ष्मण कुमार बहेरा भी मानते हैं कि पाकिस्तान भले परमाणु शक्ति संपन्न देश है लेकिन कई मामलों में भारत की तुलना में बहुत कमजोर है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमा पर 2000 किलोमीटर तक की सर्विलांस क्षमता जल्द ही हासिल कर लेगा।