हीरानंदानी अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि पांचाल हर बीमारी की गंभीर स्टेज से गुजरे, जो किसी भी कोरोना संक्रमित के लिए एक हद हो सकती है। डॉक्टरों ने कहा कि अस्पताल ने पिछले 15 महीनों में इतने लंबे समय तक बीमारी से जूझते किसी भी मरीज को नहीं देखा। डॉक्टरों ने उन पर रेमडेसिविर से लेकर प्लाज्मा थैरेपी और इलाज के दूसरे तरीके आजमाए, लेकिन जल्द कोई नतीजा नहीं निकला।
बता दें कि इस दौरान पांचाल के परिवार ने भी उन्हीं की तरह एक लंबी लड़ाई लड़ी। अंत में जब पांचाल के फेफड़ों से खून बहने लगा तो परिवार ने उम्मीद ही छोड़ दी। लेकिन एक पखवाड़े बाद आखिरकार वह इस खतरे से भी जीवित बच गए और 85 दिन बार अपने घर लौटे, तो परिवार ने भी राहत की सांस ली।