देश में अंग प्रत्यारोपण को लेकर पारदर्शिता बरतने के लिए अस्पतालों के व्यवहार पर केंद्र सरकार ने नाराजगी जताई है। बीते 15 महीने में तीन बार आदेश देने के बाद भी ज्यादातर अस्पतालों ने अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी अहम जानकारियां साझा नहीं की हैं, जिसके चलते राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) ने गंभीर चिंता जताई है।
नाटो ने अपने ताजा आदेश में दिसंबर 2023 से अब तक जारी आदेशों का हवाला देते हुए कहा, प्रत्यारोपण करने वाले अस्पतालों को 48 घंटे में दाता और अंग ग्राही के बारे में जरूरी जानकारियां देना अनिवार्य है। इस संबंध में सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को भेजे चौथे पत्र में कहा है कि कई अस्पताल अंग प्रत्यारोपण गतिविधियों की दैनिक और मासिक जानकारी नहीं दे रहे हैं। यह राष्ट्रीय प्रत्यारोपण रजिस्ट्री पर प्रत्यारोपण को पंजीकृत करने में भी विफल रहे हैं। इस तरह की लापरवाही प्रणाली को कमजोर कर रही है और देशभर में अंगदान को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्य को बाधित कर रही है।
क्या है नियम
मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की धारा 13डी के तहत नोटो को राष्ट्रीय प्रत्यारोपण रजिस्ट्री की जिम्मेदारी सौंपी है, जो अंग और ऊतक प्रत्यारोपण गतिविधियों की निगरानी, समान अंग आवंटन की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ देश में अंग और ऊतक दान को बढ़ाने के लिए नीति निर्माण का समर्थन करने के लिए आवश्यक है।
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इसलिए बढ़ी चिंता
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल ने 2024 में एक आदेश जारी कर भारत में बढ़ते विदेशियों के अंग प्रत्यारोपण पर चिंता जताते हुए राज्यों से ऐसे प्रत्यारोपणों की निगरानी बढ़ाने को कहा था। साथ ही ऐसे मामलों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसमें विदेशी नागरिकों से जुड़े प्रत्यारोपणों की जांच और मानदंडों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है।
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