देश की आम जनता को पांच सौ और हजार के नोट बंद किए जाने की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। मुंबई के गोवंडी में एक नवजात बच्चे की इलाज के अभाव में जान चली गई। बताया गया है कि गोवंडी के जीवन ज्योत हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने बच्चे का इलाज करने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि उसके माता-पिता के पास सिर्फ 500 रुपये के ही नोट थे।
नवजात बच्चे के पिता जगदीश शर्मा ने इस मामले में शिवाजी नगर पुलिस थाने में शिकायत की है लेकिन पुलिस ने उन्हें महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पास शिकायत दर्ज कराने को कहा है। बताया गया है कि मौत से पहले बच्चे की मां किरण का इलाज इसी नर्सिंग होम में डॉ. शीतम कामथ की देखरेख में हो रहा था।
डॉ. कामथ बीते 18 अप्रैल से किरण का इलाज कर रही थीं। पांच सौ और हजार के नोट पर बैन लगाए जाने से एक दिन पहले यानी आठ नवंबर को किरण के टेस्ट हुए। बाद में उन्हें बताया गया कि डिलीवरी सात दिसंबर के आसपास होगी। लेकिन, नौ नवंबर को किरण को अचानक दर्द शुरू हो गया। उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। मां और बच्चे की हालत खराब होने की वजह से दोनों को नर्सिंग होम लाया गया।
बताया गया है कि डॉ. कामथ ने शुरुआती इलाज देने के बाद उन्हें भर्ती करने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि जगदीश के पास 100 के नोट नहीं थे। छह हजार रुपये जमा कराने के लिए उनके पास सिर्फ पांच सौ के नोट ही उपलब्ध थे। बैंक और एटीएम बंद होने की वजह से वो नोट भी नहीं बदल सके। हालांकि सरकार की तरफ से नोट को बंद करने के ऐलान के साथ साफ तौर पर कहा गया था कि सरकार अस्पतालों में पांच सौ और हजार के नोट फिलहाल चलते रहेंगे लेकिन बावजूद इसके कई अस्पतालों में इन नोटों को लेने से इनकार कर दिया गया है। परिवार के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद डॉक्टर का दिल नहीं पिघला और उन्होंने किरण और बच्चे को वापस भेज दिया। शुक्रवार को बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे चेंबुर के डॉ. अमित शाह के यहां ले जाया गया लेकिन इस दौरान उसने दम तोड़ दिया।
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दीपक सावंत ने कहा है कि दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होगी। डॉ. सावंत ने कहा कि अगर उन्हें शिकायत मिलती है तो उसे महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल को भेजा जाएगा और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।