सूचना का अधिकार, रिकॉर्ड और रिपोर्ट का अधिकार, आपातकालीन चिकित्सा देखभाल का अधिकार, सूचना पर सहमति का अधिकार, गोपनीयता का अधिकार, मानव गरिमा और गोपनीयता, दूसरा परामर्श लेने का अधिकार, दरों में पारदर्शिता का अधिकार, गैर-भेदभाव का अधिकार, मानकों के अनुसार सुरक्षा और गुणवत्ता देखभाल का अधिकार, उपलब्ध होने पर वैकल्पिक उपचार चयन करने का अधिकार, दवाएं या परीक्षण प्राप्त करने के लिए स्रोत चुनने का अधिकार, उचित रेफरल और हस्तांतरण का अधिकार, नैदानिक परीक्षणों में शामिल रोगियों के लिए सुरक्षा का अधिकार, बायोमेडिकल और स्वास्थ्य अनुसंधान में शामिल प्रतिभागियों की सुरक्षा का अधिकार, रोगी का निर्वहन करने का अधिकार, या अस्पताल से मृतक का शरीर प्राप्त करना, रोगी को शिक्षा का अधिकार, सुनने का अधिकार और निवारण की तलाश का अधिकार।
मरीजों के अधिकारों की आवश्यकता क्यों?
भारत में मरीज के अधिकारों के सम्बन्ध में सभी राज्यों में एक जैसे नियम नहीं हैं। कुछ एक राज्यों ने नेशनल क्लिनिकल एस्टाब्लिश्मेंट एक्ट, 2010 को स्वीकार किया है जबकि अन्य राज्यों ने स्वयं के राज्य स्तरीय नियमों का निर्माण किया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के सभी मरीजों का उपचार किया जाना आवश्यक है, मरीजों के साथ किसी बीमारी अथवा स्वास्थ्य स्थिति जैसे एचआईवी स्टेटस, जाति व धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। (इनपुट : एजेंसी)