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आस : काबुल जेल में बंद फातिमा की मां को पीएम से उम्मीद, बेटी को क्षमा कर स्वदेश लाएगी केंद्र सरकार

Sun, 13 Jun 2021 10:12 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम।

सार

फातिमा का पति इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकी था और एक हमले में वह मारा गया। इसके बाद से वह अफगान जेल में कैद है। 
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जेल की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अफगानिस्तान की जेल में बंद केरल निवासी निमिशा फातिमा की मां को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार उनकी बेटी को क्षमा कर देगी और उसे वापस भारत लाएगी। फातिमा का पति इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकी था और एक हमले में वह मारा गया। इसके बाद से वह अफगान जेल में कैद है।

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फातिमा की मां बिंदु संपत ने कहा कि मैंने सुना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी दयालु व्यक्ति हैं। मुझे उन पर पूरा विश्वास है। उन्होंने यह बात मीडिया में आई उन खबरों पर कही जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार उनकी बेटी और तीन अन्य आईएस आतंकियों की भारतीय मूल की विधवाओं को स्वदेश लाने की इच्छुक नहीं है।

ये सभी काबुल जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले पर सरकार से कोई जानकारी नहीं दी गई है और इस मामले में रुचि न दिखाना केंद्र की एक राय भी हो सकती है लेकिन मैं बहुत आशावादी हूं क्योंकि सरकार के अंदर अन्य विचार भी हो सकते हैं और मैं उस तरफ देख रही हूं।
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उन्होंने कहा कि मुझे भगवान पर भरोसा है और भगवान उनकी बेटी की वापसी के लिए कोई न कोई हालात जरूर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर इस संबंध में ज्ञापन सौंपना चाहती हूं लेकिन इसमें कोई मदद नहीं कर रहा है।

कानून की लेंगी मदद
उन्होंने कहा कि यदि बेटी की वापसी के लिए सरकार से मदद मांगने की सारी कोशिशें नाकाम हो जाएंगी तो मैं कानून की मदद लूंगी। इसे लेकर कुछ वकीलों से मुलाकात की है और उन्होंने कानूनी विकल्प होने की बात कही है। 

हिंदू से मुस्लिम बनी थी निमिशा
निमिशा संपत पहले हिंदू थी लेकिन इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद नाम बदलकर फातिमा रख लिया। उसने आईएस के केरल के कथित आतंकी से शादी कर ली। दोनों 19 अन्य लोगों के साथ जून, 2016 में फरार हो गए और अफगानिस्तान में आईएस के कब्जे वाले इलाके में पहुंच गए। फातिमा ने वहीं बच्चे को जन्म भी दिया है।

दो साल पहले किया था आत्मसमर्पण
फातिमा और तीन अन्य ने अपने पतियों की सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में मारे जाने के बाद 2019 में आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने कहा कि अफगान सरकार ने कहा था कि वे आईएस से संबंधित मामलों में जेल में बंद लोगों को रिहा करेंगे लेकिन यहां केंद्र सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्हें अपनी बेटी के अफगानिस्तान की जेल में होने की जानकारी करीब डेढ़ साल पहले मिली थी लेकिन अब तक वापसी को लेकर कुछ हो नहीं पाया।

केंद्रीय गृहमंत्री को किया था मेल
संपत ने कहा कि इस साल सितंबर में अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद बेटी तालिबान के कब्जे में जाने का डर है। मैंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को इस बारे ई-मेल भी किया लेकिन कुछ नहीं हुआ। पिछले साल 15 मार्च को दिल्ली की एक वेबसाइट ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें फातिमा और केरल की तीन अन्य महिलाओं रफीला, सोनिया सेबास्टियन और मैरिन जैकब ने स्वदेश वापसी की इच्छा जताई थी।

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