पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को भारतीय वायुसेना के संवेदनशील दस्तावेज लीक करने के मामले में गिरफ्तार ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह के मामले में एक और खुलासा हुआ है। कैप्टन की पोस्टिंग रक्षा मंत्रालय की अत्यधिक संवेदनशील यूनिट में थी। मारवाह ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने मार्च 2016 तक हवाई वितरण अनुसंधान और विकास प्रभाग (एडीआरडी) में काम किया था।एडीआरडी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के अंतर्गत आता है जो कि भारतीय वायु सेना के अत्यधिक संवेदनशील हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली में शुमार है।
अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि क्या ग्रुप कैप्टन ने डीआरडीओ से संबंधित कोई दस्तावेज पाक खुफिया एजेंसियों को हस्तांतरित किए हैं या नहीं। 56 साल के मारवाह इस समय संयुक्त निदेशक (संचालन) के तौर पर वायुसेना के मुख्यालय में तैनात थे। भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता ने बताया कि अधिकारी पर पिछले कुछ समय से नजर रखी जा रही थी। मारवाह को अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हवाले कर दिया गया है। उनपर आरोप है कि उन्होंने गोपनीय दस्तावेजों की जानकारी वाट्सऐप के जरिए आईएसआई को दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ग्रुप कैप्टन ईगो ट्रिक में फंस गए थे। जिसकी वजह से वह गोपनीय दस्तावेजों को लीक करने के लिए राजी हो गए। फेसबुक के जरिए अरुण किरन रंधावा और महिमा पटेल के संपर्क में आए थे। सूत्रों का कहना है कि फेसबुक मैसेंजर पर महिमा पटेल ने मारवाह से कहा कि 'मैं कैसे मान लूं कि आप ढोंगी नहीं बल्कि असल में वायुसेना के ग्रुप कैप्टन हैं?' अपनी रैंक और पोस्ट पर पटेल द्वारा उठाए सवाल के कारण उसे आश्वस्त करने के अरुण ने कुछ गोपनीय दस्तावेज साझा किए थे।
पुलिस किरण और महिमा के साथ हुई अरुण की बातचीत की जांच करने की कोशिश कर रही है। हालांकि कुछ बातचीत को कैप्टन ने डिलीट कर दिया है। पुलिस महिमा और किरण नाम की यूजर के आईपी एड्रेस को ट्रेस करने की कोशिश कर रही है। अगर इसमें वह सफल हो जाती है तो यह एक ठोस सबूत साबित हो सकता है।