गृह मंत्रालय ने बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच निर्वाचन आयोग को राज्य में पिछले तीन साल में हुई राजनीतिक हिंसा पर एक रिपोर्ट सौंपी है। इसमें बताया गया है कि हाल के वर्षों में राज्य में लगातार राजनीतिक हिंसा ही घटनाएं बढ़ी हैं। 2020 में राज्य में राजनीतिक हिंसा के 663 मामले सामने आए थे। इस दौरान 57 लोगों की मौत भी हुई थी।
पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान सियासी हिंसा के 693 मामले आए, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य राजनीतिक हिंसा का गढ़ बनता जा रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018 में राज्य के पंचायत चुनावों के दौरान हिंसा की घटनाओं के अलावा चुनावी रंजिश में 23 लोगों की हत्या हुई। 2019 में जून से दिंसबर तक राजनीतिक हिंसा के 852 मामले दर्ज किए गए। इसमें 61 लोगों की मौत हो गई।
भाजपा ने आयोग से की बंगाल के अधिकारियों की शिकायत
भाजपा ने चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर शिकायत की है कि पश्चिम बंगाला के अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। भूपेंद्र यादव की अगुआई में प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को चुनाव में काम न करने वाले और छुट्टी पर गए अधिकारियों की सूची सौंपी।
पार्टी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के अधिकारी दुर्भावना से काम कर रहे हैं। जिन्हें चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होना था, वह घर बैठ गए हैं। प्रतिनिधिमंडल में धर्मेंद्र प्रधान, ओम पाठक, शिशिर भजोरिया, नीरज कुमार, डॉ संजय मयूख भी शामिल थे।