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इंटरनेट पर नियंत्रण जरूरी पर अभिव्यक्ति की आजादी पर न लगे अंकुश

Fri, 05 Mar 2021 02:28 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

  • द डायलॉग की संगोष्ठी में वक्ताओं की राय
  • 50 से अधिक विश्वविद्यालयों के 160 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने लिया भाग
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार
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इंटरनेट ने 2020 में अपने प्रभाव और विस्तार से जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। लेकिन इसकी बढ़ती उपयोगिता के साथ ही फर्जी सूचना और फेक न्यूज के मामले भी बढ़े हैं जिस पर नियंत्रण जरूरी है। ये विचार दिल्ली की टेक पॉलिसी थिंक टैंक द डायलॉग की ओर से इंटरनेट फ्रीडम पर आयोजित विचार गोष्ठी में उभर कर आए।

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इसका आयोजन 27 और 28 फरवरी को शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस आयोजन में देशभर के 50 विश्वविद्यालयों के 160 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया था।

कार्यक्रम के निर्णायक मंडल में  प्रतिस्पर्धा आयोग के पूर्व अध्यक्ष धनेंद्र कुमार, प्राइवेसी प्रोफेशनल आनंद वेंकटनारायण, पत्रकार जेबा वारसी, राहुल शर्मा और डायलॉग के संस्थापक निदेशक काजिम रिजवी थे। सिमबायोसिस लॉ स्कूल, पुणे की टीम को बेस्ट टीम का खिताब मिला।
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वहीं एनएएलएसएआर की टीम को रनर अप घोषित किया गया। जेसी बोस यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद की वंशिका नंदवानी को बेस्ट स्पीकर चुना गया, जबकि शंशाक वेंकट को सेकंड बेस्ट स्पीकर चुना गया।

 कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इंटनेट पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से लाया गया कानून ठीक है क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्ष्रा औ अफवाहों  से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि वक्ताओं ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश न लगे।

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