केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने राज्यसभा में जानकारी दी कि वर्तमान सीआरपीसी और आईपीसी में मॉब लिंचिग से संबंधित मामलों के लिए कार्रवाई का अधिकार है। इसके लिए कानून में संशोधन की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि 2014 से एनसीआरबी धार्मिक और जाति से संबंधित घटनाओं के आंकड़े अलग से जुटा रहा है। उन्होंने सदन में तीन सालों का राज्यवार ब्यौरा दिया जिसमें दो सालों से यूपी में सबसे अधिक घटनाएं हुई हैं।
प्रश्नकाल के दौरान सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने गोरक्षा के नाम पर हो रही मारपीट और हत्याओं के प्रति सरकार को गैरजिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भी कहा कि इस तरह की घटनाएं बंद हों। ऐसे में सरकार ने राज्यों को क्या कोई निर्देश दिए हैं। नया कानून बनाने जा रही है और इन मामलों पर सजा के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने जा रही है। मंत्री के बयान से असंतुष्ट सपा सांसद वेल में भी उतरे और दस मिनट के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
एक सवाल के जवाब में अहीर ने बताया कि गोकशी और गोमांस से जुड़ी अप्रिय घटनाओं के लिए एनसीआरबी अलग से रिकार्ड नहीं रखती है। हत्या के अनेक कारण होते हैं लिहाजा सभी हत्याएं एक जगह शामिल होती है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय ऐसी घटनाओं के प्रति गंभीर है ऐसी घटनाओं पर तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी के दिशा निर्देश दिए गए हैं। राज्योें से ऐसी घटनाओं के आंकड़े भी मांगे गए हैं। ऐसा कतई नहीं है कि भाजपा शासित राज्यों में ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट नरेश अग्रवाल ने कहा कि मंत्री लिखित जवाब में जानकारी नहीं दी थी अब राज्यवार जानकारी दे रहे हैं जो विशेषाधिकार का मामला बनता है। मंत्री ने कहा कि सरकार अपने कर्तव्य से मुकर नहीं रही है लेकिन कानून व्यवस्था राज्यों का काम है। गृह मंत्रालय ने दिशा निर्देश जारी किए हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा नई परंपरा और व्यवस्था बन गई नफरत के बीज बोकर कुछ लोगों पर निशाना साधो। ऐसे में सीआरपीसी और आईपीसी मेें मॉब लिचिंग परिभाषित नहीं है। जिसे मंत्री ने सिरे से खारिज कर नए किसी संशोधन से इंकार किया। एनसीपी सांसद माजिद मेनन ने कहा कि इन घटनाओं से दुनिया में देश की छवि खराब हो रही है कि पूरे समाज में अराजकता है। सिर्फ एफआईआर से काम नहीं चलेगा सरकारों को एसआईटी और फॉस्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर सजा देनी होगी। क्योंकि प्रधानमंत्री के शब्दों को असर भी नहीं हो रहा है। पीएम के कहने के अगले दिन नागपुर में घटना हुई।