रविवार को चुनाव आयोग ने श्रीनगर लोकसभा सीट पर गृह मंत्रालय की चेतावनी को दरकिनार कर उप चुनाव कराए गए थे। गौरतलब है कि रविवार को श्रीनगर में मतदान के दौरान बड़ी संख्या में हिंसा की वारदातें हुई थीं।
चुनाव आयोग द्वारा 10 मार्च को उप चुनावों की घोषणा के तत्काल के बाद गृह मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी वाला पत्र आयोग को भेजा था। पत्र में मंत्रालय ने कहा था कि श्रीनगर और अनंतनाग में उप चुनाव कराए जाने से पूर्व किसी प्रकार की सलाह नहीं ली गई। गृह मंत्रालय ने कहा था कि कश्मीर घाटी में हालात सामान्य नहीं हैं जिसकी वजह से मतदान को टाल देना चाहिए।
मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि इन उप चुनावों को अगले कुछ महीनों में पंचायत चुनाव के बाद कराना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग ने गृह मंत्रालय की सलाह को नजरअंदाज कर दिया और अपनी तय तारीखों के हिसाब से श्रीनगर और अनंतनाग में चुनाव कराने की योजना पर कार्य करने लगा।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों संसदीय क्षेत्रों में उप चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने संयुक्त सचिव के साथ 17 मार्च को एक बैठक की थी और अर्द्धसैनिक बलों की 300 कंपनियों की मांग की थी जिसे पूरा किया गया था।
अधिकारियों ने कहा कि रविवार को भारी संख्या में सुरक्षा कर्मियों के होने के बावजूद बड़ी संख्या में हिंसा हुई जिसमें आठ लोगों की हत्या हो गई और 150 अन्य घायल हो गए। रविवार को श्रीनगर में पत्थरबाजी की 190 घटनाएं हुईं, 120 चुनाव स्थलों पर मतदान नहीं करने दिया गया, 24 ईवीएम मशीनों को लूट लिया गया और दो स्कूलों को भी जला दिया गया।
रविवार को हुई हिंसा के बाद दूसरे दिन सोमवार को भी इंटरनेट सेवा ठप्प रही और जहां सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सड़कों से गायब रहीं वहीं निजी परिवहन सेवाएं थोड़ी बहुत संख्या में सड़कों पर देखी गईं।