गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल मई महीने तक 119 माओवादियों को मारा जा चुका है। जबकि पिछले साल 136 माओवादियों को मार गिराया गया था। मरने वालों की इतनी बड़ी संख्या की तुलना इसी बात से की जा सकती है कि पिछले साल 30 अप्रैल तक सुरक्षाबलों ने केवल 48 माओवादियों का मारा था। वहीं इस साल 22 और 23 अप्रैल को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 40 माओवादियों को सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर में मार दिया था।
गृह मंत्रालय ने मोदी सरकार के चार साल पूरे होने के मौके पर एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें उसने दावा किया है कि हमें आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से प्रारंभिक खतरा है। इस मामले में देशभर से उन 113 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जो इस वैश्विक संगठन के प्रति सहानुभूति रखते हैं। इसके अलावा आतंकी संगठन आईएसआईएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
मंत्रालय का कहना है कि नक्सली घटनाओं में 36.6 प्रतिशत की कमी आई है। पहले इस तरह की घटनाएं साल 2010 से 2013 के बीच 6,524 हुई थी। 2014 से 2017 तक 4,136 घटित हुईं। नागरिकों और सेना के जवानों के खिलाफ होने वाली नक्सली घटनाओं में 55.5 प्रतिशत की कमी आई है। यानी यह घटनाएं 2,428 से घटकर 1,081 हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार माओवादियों के बढ़ने का स्तर भी 510 से घटकर 445 पर सिमट गया है। जम्मू और कश्मीर में 2014 से 2017 के बीच में 619
आतंकी मारे गए हैं। जबकि 2010-13 के बीच यही आंकड़ा 471 का था। इस साल मई में अब तक 65 आतंकियों को मारा जा चुका है।