नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार की संसद में आलोचना कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। वित्त संबंधी संसदीय समिति की बैठक में मनमोहन सिंह ने कहा, 'क्या आरबीआई को सरकार के नोटबंदी के फैसले पर विचार-विमर्श करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था।' मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के निर्णय को देख रहे पैनल को सुझाव दिया है कि जब आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल इस संबंध में पैनल के सामने आएं तो उस वक्त सरकारी अधिकारी मौजूद न हों।
नोटबंदी के मुद्दे पर स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भी चर्चा की। इन्हें पैनल के सामने अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया था। विशेषज्ञों में अर्थशास्त्री राजीव कुमार और महेश व्यास, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड पॉलिसी की कविता राव और पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणव सेन थे। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि तीन विशेषज्ञों ने सरकार के नोटबंदी के फैसले की आलोचना की है।
पैनल के एक सदस्य ने बताया कि मनोमोहन सिंह ने कहा,'जब हम चर्चा करें तो आरबीआई के गवर्नर भी पैनल के सामने मौजूद होने चाहिए।' मनमोहन सिंह ने बताया कि आरबीआई के मुताबिक सरकार ने नोटबंदी का फैसला 7 नवंबर को लिया और रिजर्व बैंक के बोर्ड ने 8 नवंबर को उस पर निर्णय लिया। इसलिए यह बेहतर होगा अगर पैनल सरकार को पहले सुने और उसके बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर को। मनमोहन सिंह ने कहा कि पैनल तब आरबीआई के गवर्नर से संस्था की स्वायत्तता के बारे में पूछ सकता है।