संसद के मानसूत्र सत्र का मंगलवार को पांचवां दिन है। लोकसभा में इस समय जहां मॉब लिंचिंग से लेकर देशभर में महिलाओं के साथ बढ़ रही छेड़छाड़ की घटनाओं पर विपक्ष लामबंद होकर सरकार से जवाब मांग रही है।
आरजेडी और कांग्रेस के सांसदों ने मुजफ्फरपुर में रेप की घटना पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव को नोटिस दिया गया है। वहीं सीपीएम ने लोकसभा में पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में हिंसा को घटनाओं पर चर्चा के लिए शून्य काल का नोटिस दिया है। जबकि कांग्रेस पीएम मोदी और रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है।
आज संसद में एक बार फिर से विपक्ष ने अराजक भीड़ (मॉब लिंचिंग) को बड़ा मुद्दा बनाया जिसका जबाव गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दिया। उन्होंने कहा कि देश में लिंचिंग की घटनाएं कोई पहली बार नहीं हो रही हैं और ऐसी घटनाओं पर राजनीति करना बहुत दुखद है। उन्होंने कहा की ऐसा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी लिंचिंग 1984 की घटना थी। ऐसी कई घटनाएं मैंने भी देखी हैं।
अराजक भीड़ पर सरकार ने कई कदम उठाए हैं और एक उच्चस्तरीय कमिटी का भी गठन किया गया है। कमिटी की सिफारिशों के बाद ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। अगर कानून की जरूरत होगी तो सरकार वह भी लाने के लिए तैयार है।
वहीं इससे पहले सांसद जयप्रकाश यादव ने निर्भयाकांड को याद करते हुए कहा कि मुजफ्फपुर की घटना शर्मसार करने वाली है। उन्होंने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार का काला शासन चल रहा है। जो बच्चियों को सुरक्षा देने में असफल साबित हो रहा है। आज वहां एक निर्भया नहीं बल्कि सैकड़ों निर्भया हैं। उन्होंने गृहमंत्री से इस मामले में तुरंत कदम उठाने की मांग की है।
संसद में आज मुजफ्फरपुर रेप कांड गूंजता रहा। कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि बच्चियों को सफेदपोश लोगों के पास भेजा जाता रहा है। यही नहीं सफेदपोश ही बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। बालगृहों में रह रहीं बच्चियों से जिस्मफरोशी कराई जा रही है। सरकार को इसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने गृहमंत्री से जवाब मांगते हुए इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की।
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुजफ्फरपुर की घटना बहुत गंभीर है। अगर राज्य सरकार की ओर से सिफारिश की जाती है तो इस मामले की जांच जरूर सीबीआई को सौंपी जाएगी।