पिछले दिनों एक कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह ने यह बात कही थी। उनका कहना था कि यह नरेंद्र मोदी सरकार है, सभी को अपना अधिकार भी मिलेगा, मगर उन्हें दायित्व का निर्वहन भी करना पड़ेगा है। देश की इच्छा थी कि धारा 370 हटनी चाहिए, देश के प्रधानमंत्री ने उचित समय पर फैसला लिया। गृहमंत्री होने के नाते मैंने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उसे कार्यान्वित किया है। विपक्षी पार्टियां ठोस मुद्दे पर बहस करें।
अमित शाह का कहना था कि संसद के अंदर सभी को चर्चा का अधिकार है, किंतु अनुच्छेद 370 पर खुलकर समर्थन में आने का हौसला कोई नहीं रखता। विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना मत साफ करना चाहिए कि वह अनुच्छेद 370 के समर्थन में है या विरोध में। अनुच्छेद 370, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी का पहला एजेंडा था। हमारी पार्टी मानती है कि ये देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं था। एक देश में दो संविधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं होने चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता और देश के बहुत से लोगों की इच्छा थी कि अनुच्छेद 370 हटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को पता है कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान पूरे देश में आतंकवाद फैलाने का षड्यंत्र करता रहा है, किंतु देश के अन्य हिस्सों में वह सफल नहीं होता है। कश्मीर में एक समय तक वह सफल हुआ, तो उसका कारण था कि अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए। जिसके चलते वहां के लोगों को गुमराह किया गया। स्थानीय युवाओं के हाथ में हथियार पकड़ाए गए। अनुच्छेद 370 को समाप्त कर पाकिस्तान के दुष्प्रचार को खत्म करना आवश्यक था, इसलिए पांच अगस्त को पीएम नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को खत्म करने की अच्छी शुरुआत की।