सीआरपीएफ कॉडर के अफसरों को उम्मीद है कि शुक्रवार को केंद्रीय गृहमंत्री के सामने उनका मसला भी उठ जाए। ये कॉडर अफसर कई सालों से अपने हितों की लड़ाई यानी गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (एनएफएफयू) और गैर-कार्यात्मक चयन ग्रेड (एनएफएसयू) का लाभ दिए जाने को लेकर लगातार आवाज बुलंद कर रहे हैं। सीजीओ स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय में यह विशेष क्लास सुबह दस बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक चलेगी। पहली क्लास में सीआरपीएफ के डीजी राजीव भटनागर, स्पेशल डीजी और एडीजी रैंक के अधिकारी केंद्रीय गृहमंत्री के सामने बैठेंगे।
आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ का योगदान, इस पर एक खास रिपोर्ट तैयार की गई है। नक्सल प्रभावित इलाकों में बल की सात नई बटालियन भेजने के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी है, इस बाबत भी अमित शाह संबंधित अधिकारियों से सवाल जवाब कर सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि विशेष क्लास के दौरान बल की वित्तीय स्थिति पर विचार होगा। जवानों के लिए नए आवास और उन्हें साल में सौ दिन तक अपने परिवार के साथ रहने की योजना को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस मामले में भी बातचीत होने के आसार हैं। सीआरपीएफ के मॉडर्नाइजेशन प्लान, जिसमें माइनिंग प्रोटेक्टेड व्हीकल, हथियार, ड्रोन एवं संचार की अन्य तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है, पर खास चर्चा की जाएगी।
सीआरपीएफ के कॉडर अधिकारी बताते हैं कि केंद्र सरकार उन्हें लेकर जो नीति बना रही है, वह ठीक नहीं है। सरकार ने आईपीएस बनाम कॉडर अफसर विवाद को खत्म करने के लिए जो कमेटी बनाई है, उसमें कॉडर का कोई भी अफसर शामिल नहीं है। कमेटी में आईएएस हैं या आईपीएस। सीआरपीएफ के सेवानिवृत आईजी वीपीएस पंवार का कहना है, अगर सरकार का मन साफ है तो वह बार-बार सुप्रीम कोर्ट में समय क्यों मांग रही है। एक तरफ सरकार कहती है कि हम सभी फायदे देने को तैयार हैं तो दूसरी ओर नए सर्विस रूल फ्रेम नहीं किए जा रहे हैं।
जब तक नए रूल्स फ्रेम नहीं होते, तब तक सरकार की घोषणा का कोई फायदा नहीं होगा। वजह, वर्तमान सर्विस रूल में सभी कमांडर असंगठित कॉडर के अंतर्गत आते हैं। इसमें सरकार की मनमर्जी चलेगी और कॉडर अफसरों को कोई फायदा नहीं होगा। यदि नए सर्विस रूल फ्रेम होते हैं, तो अपने आप सभी कमांडर संगठित कॉडर में आ जाएंगे।
संगठित कॉडर का दर्जा मिलने के बाद इन अफसरों को एनएफएफयू और एनएफएसयू के सभी फायदे खुद ब खुद मिल जाएंगे। नियम तो यह कहता है कि सरकार 1986 से सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करे। अगर यह नहीं होता है तो कम से कम 2006 से सभी लाभ मिलें। पंवार के मुताबिक फिलहाल सरकार का ऐसा कोई रवैया नहीं दिखता, जिससे कॉडर अफसर राहत महसूस कर सकें। यही कारण है कि अब कॉडर अफसरों को मौजूदा गृहमंत्री से उम्मीद है कि वे उनकी समस्या का निदान करेंगे। हालांकि सूत्र बताते हैं कि इस मसले पर बल के टॉप बॉस कोई बात नहीं करेंगे।
पिछले चार-पांच वर्षों से गृह मंत्रालय में आईपीएस और विभिन्न अर्धसैनिक बलों के कॉडर अफसरों के बीच अपने हितों को लेकर विवाद चल रहा है। इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी गत फरवरी में कॉडर अफसरों के पक्ष में फैसला सुना दिया। इसमें कहा गया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को ग्रुप-ए की संगठित सेवाओं का दर्जा देकर वहां तत्काल प्रभाव से एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) लागू किया जाए। यानी एक तय समय के बाद यदि अगला रैंक (किसी वजह से जैसे सीट खाली नहीं है या कोई दूसरी दिक्कत है) नहीं मिलता है तो उस रैंक के सभी वित्तिय फायदे संबंधित अधिकारी को दें।
जिसके खिलाफ आईपीएस एसोसिएशन भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई। आरोप है कि केंद्र सरकार ने कथित तौर पर आईपीएस का पक्ष लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का हल करने के लिए एक कमेटी गठित करने की बात कह दी। इसके लिए 17 जुलाई तक का समय ले लिया गया। इसके बाद सरकार ने नवंबर तक का समय मांगा। हालांकि अभी तक एनएफएफयू पर कोई भी अंतिम फैसला नहीं हो सका है। गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इस मामले में सरकार काफी आगे बढ़ चुकी है। संभवतया एक दो सप्ताह में कोई न कोई फैसला हो जाएगा।
कॉडर अफसर बताते हैं, अगर सरकार नए सर्विस रूल फ्रेम किए बिना एनएफएफयू देती है तो उसका फायदा केवल बीस फीसदी लोगों को मिलेगा। अस्सी फीसदी कॉडर अफसर इससे वंचित रह जाएंगे। जानबूझकर कई तरह की बाधाएं खड़ी करने का प्रयास होगा। जैसे, प्रमोशन कोर्स की शर्त लगाई जा सकती है। सरकार कहेगी जिन्होंने ये कोर्स नहीं किया है, उन्हें फायदे नहीं मिलेंगे। देश में 55 संगठित सेवाएं हैं, वहां एनएफएफयू और एनएफएसयू, दोनों का फायदा मिलता है।
अर्धसैनिक बलों के कॉडर अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट से समय मांगे जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि वह कॉडर अफसरों को नए सर्विस रूल के तहत उक्त फायदे नहीं देना चाहती। कॉडर अफसरों को इस बात का मलाल है कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, तो आईपीएस एसोसिएशन हमारे खिलाफ अदालत पहुंच गई। पहली बार उनकी याचिका स्वीकार ही नहीं की गई। एसोसिएशन वाले दोबारा स्पष्टीकरण याचिका लेकर अदालत में पहुंच गए। उधर, केंद्र सरकार ने इस मामले में फाइनल जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अब 30 नवंबर तक का समय मांगा है।