उनके जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समसामयिक चिंता का अक्स साफ नजर आ रहा था। सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, उपनेता आनंद शर्मा समेत पूरे सदन को अपने जवाब की प्रस्तुति से संतुष्ट कर दिया। उनके जवाब में सरकार की छवि को लेकर राजनीतिक, क्षेत्रीय, सामाजिक और वैश्विक दबाव भी साफ दिखाई दे रहा था।
केंद्रीय गृहमंत्री का संसद के दोनों सदनों में पिछला इतिहास रहा है। वह चर्चा के दौरान सांसद और गृहमंत्री रहते हुए विपक्ष के सवालों पर उसका कोई हिसाब बकाया नहीं रखते, लेकिन पहली बार उन्होंने थोड़ा सा समझौतावादी रुख दिखाते हुए इसमें उलझने से परहेज किया।
कपिल सिब्बल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए अमित शाह को लौहपुरुष कहकर बड़ा ताना मारा था। अमित शाह को उनकी संवैधानिक ड्यूटी बताई थी। दिल्ली पुलिस के रवैये पर सवाल और गृहमंत्री की क्षमता को कठघरे में खड़ा कर दिया था। लेकिन इसका अमित शाह ने बड़ी ही कुशलता से जवाब दिया।
कपिल सिब्बल ने एफआईआर का जिक्र किया था। गृहमंत्री ने कहा कि वह उसका संदर्भ दे दें, सरकार उस पर ध्यान देगी। गृहमंत्री ने अपने जवाब में अपनी चिरपरिचित शैली से अलग रुख लिया। जवाब में राजनीति का स्थान बहुत ही सीमित रखा। शाह ने कहा कि जांच के नाम पर किसी को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
पूरी जांच वैज्ञानिक आधार पर की जा रही है और पूरी प्रमाणिकता के साथ दिल्ली में हिंसा का षडयंत्र रचने वाले या इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को पाताल से भी ढूंढकर लाया जाएगा। शाह ने सदन को आश्वस्त किया कि इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने दंगाइयों से दंगे में हुए नुकसान का जुर्माना वसूलने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जज की मांग करने की जिम्मेदारी दी। शाह ने दिल्ली पुलिस को केवल 12 पुलिस थाने तक दंगा सीमित रखने, इसे न फैलने देने तथा 36 घंटे में दंगा नियंत्रित कर लेने के लिए उसकी पीठ थपथपाई।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की चिंता का जवाब दिया। आजाद ने पुनर्वास और दंगे में नुकसान उठाए लोगों के मुआवजे के बारे में जानकारी चाहते थे। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार इस बारे में दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। पहले से अच्छा पुनर्वास और मुआवजा का पैकेज तैयार किया गया है। वह इसका विवरण शुक्रवार को आजाद के दफ्तर में भेज देंगे।