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राज्यसभा: संविधान पर चर्चा में कांग्रेस पर जमकर बरसे अमित शाह, सुनाया इंदिरा और किशोर कुमार का किस्सा

Wed, 18 Dec 2024 12:21 AM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Amit Shah Shah in rajya sabha: संविधान पर चर्चा के दौरान राज्य सभा में आज अमित शाह ने कांग्रेस पर नागरिक अधिकारों का कत्ल कर संविधान संशोधन करने का आरोप लगाए। उन्होंने अपने संबोधन में आपातकाल को भी याद किया और उस वक्त का एक किस्सा भी संसद में साझा किया।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : PTI
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विस्तार
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 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी ने संविधान को एक परिवार की निजी जागीर माना और संसद के साथ धोखाधड़ी की। दो दिवसीय चर्चा पर सरकार का पक्ष रखते हुए शाह ने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उन्हें शर्म करनी चाहिए।
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अमित शाह ने आपातकाल को लेकर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि कई लोगों को इन्होंने जेल में डाल दिया था। जिसमें से कई लोग आज इनके साथ बैठे हैं। देश पर कोई हमला हुआ था क्या या देश में कोई आफत आ गई थी। बस इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके निर्वाचन को अयोग्य ठहरा दिया था। नीरज डे एक यस सर कहने की वजह से 11 साल तक देश के अटॉर्नी जनरल रहे। मैं तो छोटा था, जेल में नहीं जाना पड़ा। मेरी आयु होती तो पूरे 19 महीने जेल में बंद रहना पसंद करता। अमित शाह ने बताया कि, कैसे उन्हें इमरजेंसी के बारे में पता चला? अमित शाह ने कहा, मैं बिनाका गीतमाला सुनता था। ये रेडियो पर आती थी और एक दिन अचानक बंद हो गई। मैंने घर मैं झगड़ा किया कि गीतमाला क्यों नहीं आती। मेरे पड़ोस वाले चाचा ने कहा कि किशोर कुमार के साथ इंदिरा जी का झगड़ा हो गया है। इसलिए बिनाका गीतमाला में किशोर कुमार की आवाज अब नहीं सुनाई देगी। लता दीदी की आवाज में फिर से रिकॉर्डिंग हुई और तब यह कार्यक्रम शुरू हुआ। ये इमरजेंसी में हुआ था। जब लाखों लोग बिना अपराध के जेल में डाल दिए गए थे।

इंडिया गठबंधन पर भी निशाना
अमित शाह ने आगे कहा कि, संविधान दिवस मनाने पर लोग सवाल करते हैं, इसको जितनी बार स्मरण करोगे उतनी ही संविधान पर आस्था मजबूत होगी। अमित शाह ने दुष्यंत कुमार की आपातकाल पर लिखी पंक्तियों को ससंद में पढ़ा। अमित शाह ने कहा कि जब संविधान बन रहा था, हर आर्टिकल पर चर्चा चल रही थी। हम आजाद हो गए थे लेकिन देश कोई नया नहीं बना है। दुनिया में सबसे पुराना जीवन लेकर निकले हुए देश हैं। आगे देश कैसे चले, बस इसका एक दस्तावेज बनाना था। अंग्रेज लिखकर गए थे इंडिया, वो भारत जानते ही नहीं थे। आजाद होने पर इस पर चर्चा हुई, सेठ गोविंद दास ने कहा कि नाम भारत होना चाहिए और जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि और पीछे देखने की जरूरत नहीं है, भविष्य की ओर देखने की जरूरत है और इंडिया भी रहा, भारत भी रहा। इंडिया के नजरिये से देखोगे तो भारत समझ नहीं आएगा।  इसीलिए इन्होंने अपने गठबंधन का नाम भी इंडिया ही रखा। 
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अमित शाह ने कहा कि, हमारी पुरानी परंपराओं पर हमें शर्म नहीं है। हम परंपराएं बदलेंगे। इंडिया गेट पर किंग पंचम जॉर्ज की मूर्ति हटा दी और सुभाष बाबू की प्रतिमा लगा दी। हमने वीर छत्रपति शिवा जी महाराज की प्रतिमा लगा दी।  हमने राष्ट्रीय शहीद स्मारक बनाया और अमर जवान ज्योति को विलीन करने का काम किया। सेंगोल को इलाहाबाद के म्यूजियम में भेज दिया, नरेंद्र मोदीजी ने सेंगोल के विधिवत सेंगोल को संसद में स्थापित करने का काम किया।

'कच्चातिवू द्वीप हमारा भूभाग है, लेकिन हमारे पास नहीं'
अमित शाह ने कांग्रेस पर नागरिक अधिकारों के कत्ल के लिए संविधान संशोधन करने का आरोप लगाते हुए कच्चातिवू द्वीप को लेकर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि रातोंरात इन्होंने ये द्वीप श्रीलंका को दे दिया और संसद के पास विषय ही नहीं आया। आज भी यह हमारा भूभाग है, लेकिन हमारे पास नहीं है। आपने पार्टी को तो परिवार की जागीर समझा ही है, संविधान को भी परिवार की जागीर समझ लिया है।
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