केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कोई भी सभ्य व्यक्ति 1984 के दंगे नहीं भूल सकता। राजनीतिक इशारे पर नृशंस हत्याएं की गईं लेकिन, किसी दोषी को सजा नहीं दी गई। 2014 में पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद दंगे के 300 मामलों को फिर से खोला गया और दोषियों को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई।
गृह मंत्री शाह ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तरफ से आयोजित अभिनंदन समारोह में शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार यह तय करेगी कि जो भी मामले चल रहे हैं, उनमें पीड़ितों को इंसाफ मिले। मोदी सरकार ने ही पहली बार 3,328 पीड़ित परिवारों में से प्रत्येक को 5 लाख रुपये देने और जलिया वाला बाग स्मारक को फिर से गौरवान्वित करने का काम किया है।
मानवता के लिए सिख गुरुओं के बलिदान की बराबरी नहीं
सिख कौम हमेशा सबसे आगे रही
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तरफ से आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भारत की आजादी के आंदोलन, मुगलों और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई, विभाजन की विभीषिका या आजादी के बाद देश की सीमाओं को सुरक्षित करना हो, सिख कौम हमेशा सबसे आगे रही है। हमारा आजादी के संघर्ष का इतिहास सिख बहादुरों के बलिदान से भरा पड़ा है और देश के आजाद होने के बाद इसकी सुरक्षा के लिए भी सबसे अधिक बलिदान सिख पंथ के अनुयायी ही देते आए हैं।