शाह ने बताया कि रविवार को ऋषिगंगा नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण 13.2 मेगावाट क्षमता की एक छोटी पनबिजली परियोजना पूरी तरह बह गई और तपोवन में एनटीपीसी की निर्माणाधीन 520 मेगावाट की पनबिजली परियोजना को भी नुकसान पहुंचा।
अब निचले इलाके में बाढ़ का खतरा नहीं
शाह ने उत्तराखंड सरकार के हवाले से बताया कि अब निचले क्षेत्र में बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। साथ ही जल स्तर में भी कमी आ रही है। केंद्र एवं राज्य की सभी एजेंसियां स्थिति पर कड़ी निगाह रखे हुए हैं।
सोमवार शाम तक 20 की मौत
शाह ने उत्तराखंड सरकार से मिली सूचना को साझा करते हुए कहा कि सोमवार की शाम पांच बजे तक इस आपदा में 20 लोगों की जान जा चुकी थी और छह लोग घायल हुए। आपदा में 197 लोग लापता हुए, जिसमें एनटीपीसी की निर्माणाधीन परियोजना के 139 कर्मचारी, ऋषिगंगा परियोजना के 46 कर्मचारी और 12 ग्रामीण शामिल हैं।
शाह ने कहा कि घटना स्थल के समीप के 13 गांवों से संपर्क बिलकुल कट गया है। इन गांवों में रसद, जरूरी सामान और दवा आदि सामग्रियों को हेलीकाप्टर के जरिये पहुंचाया जा रहा है। राज्य सरकार ने सभी स्थानों पर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है।
दोनों सदनों में सदस्यों ने इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में कुछ पलों तक अपने स्थानों पर खड़े होकर मौन रखा। राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडु ने दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए उम्मीद जताई कि इस आपदा के बाद चलाए जा रहे बचाव एवं राहत कार्य से लोगों को समुचित लाभ मिलेगा। वहीं, लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक घटना पर यह सभा शोक प्रकट करती है।