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जम्मू-कश्मीर को लेकर कई भ्रम दूर कर गए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिया कड़ा संदेश

Fri, 28 Jun 2019 07:06 PM IST
Gaurav Pandey शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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भाजपा अध्यक्ष और देश के गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर पर अपनी बेबाक राय रखी। शाह ने राज्य के दो दिन के दौरे के बाद लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया। इस दौरान वह किसी भ्रम में नहीं दिखाई दिए। उन्होंने कड़क अंदाज में संदेश दिया कि अलगाववादियों का भय जायज है, यह अभी और बढ़ेगा। 

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शाह ने लोकसभा में जोर देकर कहा कि संविधान में धारा 370 अस्थायी है और जम्मू-कश्मीर पर उनके एजेंडे में कोई बदलाव नहीं आया है। गृह मंत्री ने आक्रामक अंदाज बनाए रखा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की बोलती बंद करते हुए जम्मू-कश्मीर के संकट के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भूल को जिम्मेदार ठहराया। 

अमित शाह का मास्टर स्ट्रोक

अभी तक जम्मू-कश्मीर पर कुछ दशकों में किसी गृह मंत्री ने इतनी बेबाकी से राय नहीं रखी है। शाह ने अपने वक्तव्य में 1947 से लेकर 2014 तक के दौर को समेटने की कोशिश की। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीर को लेकर इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत से केंद्र सरकार की नीतियों को जोड़ा। 

कश्मीर की समस्या के लिए राज्य के अब्दुला परिवार, मुफ्ती परिवार और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताने की कोशिश की कि केंद्र सरकार किसी भी तरह के अनर्गल दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है। भाजपा के नेता भी शाह के लोकसभा में इस बयान को उनके मास्टर स्ट्रोक के तौर पर देख रहे हैं। 

जो कहा साफ कहा

शाह ने संसद में अपने वक्तव्य में जम्मू-कश्मीर को लेकर स्पष्ट नजरिया सामने रखा। उन्होंने कहा कि अभी तक जम्मू-कश्मीर में तीन परिवारों ने शासन किया, लेकिन अब वहां इंसानियत, जम्हूरियत, कश्मीरियत के साथ लोकतंत्र जिंदा हो रहा है। 40 हजार पंचायतों को अधिकार मिला और निकाय, पंच अपना काम कर रहे हैं। 

शाह ने साफ किया कि विपक्ष के ये आरोप बेबुनियाद हैं कि जम्मू-कश्मीर नियंत्रण के बाहर है। उन्होंने कहा कि राज्य के हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। इसके लिए स्थानीय निकाय, पंचायत और लोकसभा चुनाव का उदाहरण दिया। शाह ने कहा कि दोनों चुनावों न तो हिंसा हुई और न ही किसी के रक्त का एक कतरा बहा। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है। वहां जब भी चुनाव आयोग चाहे चुनाव कराने की घोषणा कर सकता है। गृह मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि विधानसभा चुनाव भयरहित, निष्पक्ष और सुरक्षा के वातावरण में होंगे। सरकार ऐसा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। 

परिसीमन पर अभी नहीं बोले

केंद्रीय गृह मंत्री राज्य के परिसीमन पर कुछ नहीं बोले। वह राय रखते-रखते रह गए। लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार राज्य में शांति और स्थायित्व की बहाली के लिए जो उचित बन पड़ेगा करेगी। खास बात यह रही है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन छह महीने के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव और जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री ने किसी तरह का संकोच और मुरव्वत नहीं दिखाई। 

ओवैसी ने गृह मंत्री से परिसीमन को लेकर जानना चाहा। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अपने अंदाज में आए। बोलते-बोलते टाल गए। उन्होंने कहा ओवैसी जी अभी छोड़िए इसको। लेकिन गृहमंत्री के अंदाज से लग रहा था कि सरकार इस मुद्दे पर काफी गंभीर है। 
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शाह की रणनीति का हिस्सा है लोकसभा का वक्तव्य

अमित शाह शानदार होमवर्क के लिए जाने जाते हैं। वह नए तरीके से सोचते हैं और दूरगामी लक्ष्य को केंद्र में रखकर सभी विकल्पों पर विचार करने के बाद आगे कदम बढा़ते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री को समझने वालों का मानना है कि जिस तरह की केमिस्ट्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बीच में है, भारतीय राजनीति के इतिहास में शायद ही किसी जोड़ी में रही हो। शाह ने प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप जम्मू-कश्मीर पर अपनी रणनीति के तहत ही खुलकर राय रख दी है। 

शाह ने प्रधानमंत्री द्वारा राज्यसभा में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की तारीफ किए जाने के बाद लोकसभा में उन्हें (नेहरू) को सीधे जम्मू-कश्मीर समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। 900 से अधिक अलगाववादी नेताओं को दी गई राज्य सुरक्षा को वापस लेने की जानकारी दी और बताया कि केंद्र सरकार टुकड़े-टुकड़े गैंग की सदस्य नहीं है। भारत विरोधी और और अलगाववादी तत्वों के भीतर भारतीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था का डर पैदा होना जरूरी है। सरकार को इसमें कोई एतराज नहीं है। चर्चा में सबसे बड़ी बात यह रही है जम्मू-कश्मीर में धारा-370, अनुच्छेद 35ए हटाने जैसे विषयों पर सरकार के न हिचकने का संदेश दिया है।
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