भारतीयों में अपना घर खरीदने की चाह तेजी से बढ़ी है। 31 फीसदी लोग अगले पांच साल में घर खरीदना अपना सबसे बड़ा वित्तीय लक्ष्य मानते हैं। बचत और निवेश पर भी जोर बढ़ा है। क्या भारतीय अब खर्च से ज्यादा लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं?
भारतीयों में वित्तीय आत्मविश्वास बढ़ने के साथ अब खर्च के बजाय लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा पर जोर बढ़ रहा है। होम क्रेडिट इंडिया की द ग्रेट इंडियन वॉलेट 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, निम्न-मध्यम वर्ग के 31 फीसदी लोग अगले पांच साल में अपना घर खरीदना सबसे बड़ा वित्तीय लक्ष्य मानते हैं। पिछले साल के मुकाबले इसमें 8 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। घर खरीदना महिलाओं की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। 40 फीसदी महिलाओं ने अगले पांच साल में घर खरीदने को लक्ष्य बताया, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 29 फीसदी रहा। घर खरीदने के बाद कारोबार शुरू या बढ़ाना 25 फीसदी लोगों की प्राथमिकता रही।
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औसत आय 35 हजार, 14 हजार बचने की गुंजाइश
सर्वे में शामिल लोगों की औसत मासिक आय 35 हजार और जरूरी खर्च 21 हजार रुपये रहा। 53% लोग खर्च निकालने के बाद बचत कर पा रहें। 36% के पास कुछ बचत नहीं कर पाते। 11% लोग उधार लेकर खर्च चलाते हैं।
घर के बाद कारोबार और बच्चों की पढ़ाई: पांच साल के लोगों के वित्तीय लक्ष्यों में मकान खरीदना 31%, कोई कारोबार शुरू करना या उसे बढ़ाना 25%, बच्चों की शिक्षा 14%, कर्ज चुकाना 10% और कार खरीदना 9% शामिल है। दोपहिया वाहन और विदेश यात्रा जैसे अपेक्षाकृत गैर-जरूरी खर्चों की प्राथमिकता घट रही है।
बचत और निवेश में भी उछाल
वित्तीय कल्याण सूचकांक 2025 के 34 से बढ़कर 2026 में 40 हो गया। बचत सूचकांक 23 से बढ़कर 31, निवेश सूचकांक 17 से बढ़कर 31 पहुंच गया। यानी लोग सिर्फ पैसा बचाने के बजाय उसे संपत्ति बनाने में लगा रहे हैं।
85% को लक्ष्य पूरा होने का भरोसा: 85% लोगों को भरोसा है कि वे अगले पांच साल में अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल कर लेंगे। वहीं 87 फीसदी को उम्मीद है कि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।