ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर में शनिवार को रंगभरनी एकादशी से होली का शुभारंभ हो जाएगा। शनिवार शाम ठाकुर बांकेबिहारी महाराज जगमोहन में निकल सफेद पोशाक धारण कर अपने रजत सिंहासन पर विराज भक्तों के साथ होली खेलेंगे।
मंदिर के सेवायत आचार्य प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी और डा. ब्रजकिशोर गोस्वामी ने बताया रंगभरनी एकादशी पर ठाकुर बांके बिहारी जी के लिए शुद्ध केसर का रंग बनाया जाता है।
सेवायत सबसे पहले स्वर्ण-रजत निर्मित पिचकारी से ठाकुरजी के ऊपर रंग डालते हैं, इसके बाद होली का परंपरागत शुभारंभ होता है। उन्होंने बताया कि टेसू के रंगों के साथ साथ चोवा, चंदन के अलावा अबीर-गुलाल से होली खेली जाती है। होली का उत्सव रंगभरनी एकादशी से शुरू होकर पूर्णिमा की शाम तक चलता है।
धुलेंडी वाले दिन ठाकुरजी भक्तों पर रंग नहीं डालते बल्कि गुलाबी पोशाक पहन स्वर्ण सिंहासन पर राजा बनकर बैठते हैं और अपने भक्तों को होली खेलते देखते हैं। इसी दिन सुबह मंदिर के सेवायत क्षेत्र में चौपाई (भ्रमण) निकालते हैं। समाज गायन के साथ बधाई गीत होते हैं।