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कोरोना वायरस : वुहान के मरीजों पर नहीं हुआ एचआईवी की दवा का असर

Fri, 20 Mar 2020 04:34 AM IST
गौरव पाण्डेय परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

  • भारत में दो मरीजों को इसी दवा के मिश्रण से ठीक करने का दावा
  • वुहान में 199 संक्रमित मरीजों पर अध्ययन के बाद सामने आई रिसर्च
  • भारतीय डॉक्टरों ने भी एचआईवी की दवा पर जताया कम भरोसा
  • देश में सबसे ज्यादा सफदरजंग में मरीज हुए डिस्चॉर्ज, एंटीवायरल डोज से उपचार
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विस्तार
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भारत में पिछले कुछ दिनों से एचआईवी की दवा लोपिनाविर/रिटोनाविर काफी चर्चाओं में है। जयपुर के डॉक्टरों ने इनके साथ मलेरिया और स्वाइन फ्लू की दवाओं का मिश्रण भी दिया था। इसके बाद डॉक्टरों ने दो इटली नागरिकों के स्वस्थ्य होने का दावा किया है लेकिन चीन के जिस शहर से कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैला है। वहां के डॉक्टरों ने कोरोना संक्रमित मरीजों में एचआईवी दवा बेअसर होने की पुष्टि की है।

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बृहस्पतिवार को सामने आई चीन के डॉक्टरों की रिसर्च में एचआईवी की दवाओं को कोरोना के इलाज में कारगर नहीं बताया है। इसका दावा है कि कोरोना संक्रमित व्यस्क मरीजों में इस दवा का कोई असर दिखाई नहीं दिया है। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार कोविड-19 के कारण होने वाली गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अभी तक कोई भी प्रभावी उपचार साबित नहीं हुआ है।

इस पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि अभी तक कोरोना वायरस को लेकर भारत किसी निष्कर्ष स्थिति में नहीं है। जिन्हें गंभीर बीमारियां हैं, उनके लिए ये वायरस जानलेवा हो सकता है लेकिन जयपुर के एसएमएस में भर्ती दो मरीजों को एचआईवी, स्वाइन फ्लू और मलेरिया की मिश्रित दवा देने की मंजूरी दी गई थी जिसके बाद दोनों ही मरीज ठीक भी हो गए। फिलहाल भारत के पास कोरोना वायरस और इसके उपचार को लेकर कोई ठोस दावा नहीं है।
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दिल्ली एम्स के मेडिसिन विभाग के एक वरिष्ठ डॉक्टर बताते हैं कि साल 2003 में कोरोना के ही सार्स (एसएआरएस) वायरस ने कई देशों को चपेट में लिया था। उस वक्त लोपिनाविर और रिटोनाविर दवा के अच्छे परिणाम मिले थे लेकिन फिलहाल ऐसा कोविड-19 में देखने को मिले, ये जरूरी नहीं है।  

देश में कोरोना का सबसे बड़ा नोडल केंद्र दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में है। यहां के निदेशक डॉ. बलविंदर सिंह का कहना है कि अब तक उनके यहां से आठ मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि लक्षणों के आधार पर मरीज का वे इलाज कर रहे हैं। एंटीवायरल डोज का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसमें पैरासिटामॉल भी एक है। हालांकि अभी तक इन्होंने एचआईवी, स्वाइन फ्लू और मलेरिया में इस्तेमाल दवाओं का मिश्रण किसी भी संक्रमित मरीज को नहीं दिया है।

इन मरीजों पर हुआ अध्ययन

चीन के हुबई प्रांत स्थित वुहान के जिन यिन तान अस्पताल में 03 फरवरी से 199 कोरोना संक्रमित मरीजों पर अध्ययन शुरू हुआ। 199 में 120 पुरूष और 79 महिला मरीज शामिल थीं। इन सभी मरीजों की औसत आयु 58 वर्ष थी। इनमें गर्भवती महिला शामिल नहीं है। 199 में से 23 को डायबिटीज, 13 को कार्डियोवास्कुलर डिजीज और छह लोगों को कैंसर की बीमारी थी। 182 लोगों में बुखार, 37 लोगों में सांस लेने की दिक्कत और दो मरीजों को ब्लड प्रैशर की शिकायत थी।

ऐसे शुरू हुआ अध्ययन

करीब 20 से ज्यादा डॉक्टरों ने 14 दिन तक 99 और 100 मरीजों को दो समूह में आइसोलेशन पर रखा और उनमें से एक (99) समूह को लोपिनाविर 400 एमजी और रिटोनाविर 100 एमजी की डोज दिन में दो बार दी गई। पहले समूह में भर्ती 99 में से पांच मरीजों को डोज नहीं दे सके, क्योंकि भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर ही तीन मरीजों की मौत हो गई। जबकि अन्य दो मरीजों को डोज नहीं दी जा सकती थी। इसीलिए 94 मरीजों को ही ये उपचार दिया गया। जबकि दूसरे समूह (100) को स्टैंडर्ड केयर में रखा गया।

28 दिन में पांच बार लिए सैंपल

प्रशिक्षित नर्सों के जरिए हर दिन इनकी निगरानी की जा रही थी। डोज देने से पहले सैंपल लेने के बाद पांचवे, 10वें, 14, 21 और 28 दिन तक इनके सैंपल लिए गए। इन सैंपल की जांच चीन की ही टेडी क्लिनिकल रिसर्च लेबोरेटरी में जांचा गया।

ये निकले रिसर्च के परिणाम

अध्ययन में ये सामने आया कि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को कोविड-19 संक्रमण होने पर लोपिनाविर और रिटोनाविर दवा का असर नहीं होता है। नैदानिक उपचार में इन दवाओं के इस्तेमाल से कोई तेजी नहीं आई। न ही गंभीर मरीजों में मृत्यु की आशंका को कम किया। साथ ही बुखार भी कम नहीं हुआ। अध्ययन के अंत में भी जिन मरीजों को ये दवाएं दी गईं। 28 दिन बाद उनमें से 40 फीसदी मरीजों को बुखार की शिकायत थी। इनके अनुसार गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के कोरोना संक्रमित होने के बाद उनके शरीर में वायरस 20 से 37 दिन तक रह सकता है।
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भारत में हर सप्ताह ऐसे बढ़े केस

सप्ताह अवधि संक्रमितों की संख्या प्रभावित राज्य
पहला 2 से 7 मार्च 31 दिल्ली, तेलंगना, राजस्थान, केरल
दूसरा 8 से 14 मार्च 51 दिल्ली, तेलंगना, केरल, यूपी, राजस्थान, लद्दाख, पंजाब, महाराष्ट्र, जम्मू
तीसरा 15 से 19 मार्च 81 18 राज्य

(19 मार्च तक कुल 166 मंत्रालय के अनुसार)
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