बता दें श्रृंगेरी मठ का प्रभाव संपूर्ण दक्षिण भारत में है। श्रृंगेरी, शिवमोगा, चिकमंगलूर और आसपास के जिलों में जनता दल(एस) नहीं बल्कि भाजपा के साथ कांग्रेस का मुकाबला है। शिवमोगा से खुद भाजपा के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए गए पूर्व मुख्यमंत्री वीएस येदुयेरप्पा सांसद हैं और जिले की शिकारीपुरा की अपनी पुरानी सीट पर चुनाव मैदान में हैं। शिकारीपुरा और शिवमोगा में लिंगायतों के जैसी ही तादाद है, लेकिन श्रृंगेरी और चिकमंगलूर में वोक्कालिंगा ज्यादा हैं।
इस पट्टी में मुसलमानों, ईसाईयों, मलयालम भाषियों, दलितों और पिछड़ों की भी खासी तादाद है। पिछले पांच सालों में राज्य में जिस तरह की जातीय और आर्थिक गोलबंदी हुई है उससे चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प हो गया है। 2008 में भाजपा को यहां अच्छी कामयाबी मिली थी, लेकिन 2013 में भाजपा के हाथ से कई सीटें निकल गईं। भाजपा उन्हें फिर से पाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रही है। भाजपा के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने तूफानी प्रचार से पार्टी कार्यकर्ताओं और अपनी नैया पार लग जाने की उम्मीद है।
शिमोगा में मार्केटिंग व्यवसाय से जुड़े भाजपा समर्थक नागभूषण के मुताबिक मोदी के प्रचार से पार्टी कार्यकर्ताओं और जनाधार में जान आ गई है। नागभूषण कहते हैं कि येदियुरप्पा को लेकर कार्यकर्ताओं में वैसा उत्साह नहीं है जैसा 2008 में था। लेकिन मोदी के आ जाने से अब कार्यकर्ता येदियुरप्पा के लिए नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी के लिए मैदान में निकल पड़े हैं। एक अन्य भाजपा समर्थक नागराज कहते हैं कि मोदी के प्रचार में आने से जातीय गोलबंदी टूट गई है और समीकरण बदलने लगे हैं।
लेकिन श्रृंगेरी के मुतिन्नाकोप्पा गांव में चाय की दुकान चला रहे नदीम का दावा है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने गरीबों और वंचितों के लिए इतना काम किया है कि लोग एक बार फिर उन्हें मौका देंगे। नदीम और उनके साथ खड़े पद्मनाभ बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच, मुफ्त दवाई, इलाज, गरीबों को मुफ्त चावल, किसानों की कर्ज माफी और बच्चों को दूध ने सिद्धारमैया और कांग्रेस को अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और दलितों के बीच लोकप्रिया बना दिया है। इसलिए यह तीनों तबके जमकर उनके साथ हैं।
अगर श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो लोग यहां भाजपा के मौजूदा विधायक जीवराज और कांग्रेस के राजेन्ना गौड़ा के बीच सीधा मुकाबला बताते हैं। हालांकि जद(एस) के वेंकटेश भी मैदान में हैं। वोक्कालिंगा बहुल इस सीट पर ये दोनों उम्मीदवार वोक्कालिंगा हैं। पिछली बार भी इनकी ही टक्कर हुई थी, तब भाजपा के जीवराज महज 1500 वोटों से जीते थे। बैंक की नौकरी से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर कॉफी उत्पादन से जुड़े नागेश्वर राव भी मानते हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार को सहानुभूति के साथ साथ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों का समर्थन मिल रहा है इसलिए उनका पलड़ा भारी है। राव ने ये भी बताया कि इसके बावजूद
भाजपा उम्मीदवार जीवराज को कमतर मानना भूल होगी। मुकाबला कांटे का है।