मलेशिया में 25वां सुल्तान अजलन शाह कप चल रहा है। भारतीय टीम पाकिस्तान और मलेशिया को हराकर फाइनल में पहुंची है। लेकिन जिस सुल्तान के नाम से दशकों से अंतरराष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट खेला जा रहा है उसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। जानें कौन थे सुल्तान अजलन शाह और क्यों पड़ा इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का नाम अजलन शाह कप?
1928 में मलेशिया के एक शाही परिवार में पैदा हुए अजलन शाह का पूरा नाम सुल्तान अजलन मुहीबुद्दीन शाह है। अजलन शाह मलेशिया के राज्य पेरक के 34वें सुल्तान यानी राजा रहे हैं।
अजलन शाह के बारे में कहा जाता है कि उनका बचपन तो मलेशिया में बीता लेकिन उच्च शिक्षा के लिए वह यूरोप चले गए थे। इसके पहले जब वह मलेशिया में स्कूली पढ़ाई पूरी कर रहे थे तभी हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने पेरक राज्य की टीम की ओर से हॉकी खेला और अपने समय में हॉकी के बेहरीन खिलाड़ी रहे।
यूरोप में पढ़ाई के बाद अजलन शाह बने जज
अजलन शाह
यूरोप में पढ़ाई करने के बाद अजलन शाह जब स्वेदेश लौटे तो उन्हें एक न्यालय में जज बना दिया गया और कुछ ही दिनों में प्रमोशन के बाद मलेशिया के सुप्रीम कोर्ट 'फेडरल कोर्ट' के मुख्य न्याधीश बने। अजलन शाह को मलेशिया में सबसे कम उम्र के न्याधीश और मुख्य न्याधीश होने का गौरव हासिल है।
कुछ समय बाद पेरक राज्य के सुल्तान और उनके चाचा का निधन हो गया तो वह पेरक के सुल्तान बने। यह भी कहा जा रहा है कि उनके पिता तो शाही परिवार से थे लेकिन मां एक आम महिला थीं जिससे उनका पालन पोषण महलों से बाहर हुआ।
पेरक का सुल्तान बनने के बाद अजलन शाह का हॉकी के प्रति प्यार फिर से जागा और उन्होंने हॉकी को बढ़ावा देने के लिए ध्यान दिया। अजलन शाह ने 1983 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट कराया था।
1998 से हर साल होने लगा अजलन शाह कप
शुरुअाती दिनों में अजलन शाह कप अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के तौर कुछ सालों के गैप पर हुआ। धीरे-धीरे इस टूर्नामेंट की लोकप्रियता इतनी ज्यादा बढ़ गई 1998 से यह टूर्नामेंट हर साल होने लगा।
'अजलन शाह कप' का नाम मलेशिया के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और पेरक के सुल्तान अजनल मुहीबुद्दीन शाह के नाम हॉकी के प्रति उनके गहरे लगाव को देखते हुए रखा गया था। इस अजलन शाह कप से अपने दुनिया में अपने नाम का ढंका बनाजे वाले सुल्तान का निधन 2014 में हो गया था।