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ऐतिहासिक: जेपी की क्रांति के 50 साल, जनता की भलाई की उम्मीद से 1974 में जली थी सम्पूर्ण क्रांति की अलख

Fri, 07 Jun 2024 06:16 AM IST
निर्मल कांत ब्यूरो, पटना।

सार

Historical: सुधीर कुमार झा ने अपनी किताब, ए न्यू डॉन : पटना रीइनकार्नेटेड में जेपी आंदोलन के बारे में लिखा है कि 5 जून, 1974 को जय प्रकाश नारायण ने गांधी मैदान में एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि यह एक क्रांति है, दोस्तों! हम यहां केवल विधानसभा को भंग होते देखने के लिए नहीं आए हैं। यह हमारे सफर में केवल मील का एक पत्थर है, लेकिन हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है।
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समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के पटना के गांधी मैदान में 5 जून, 1974 को सम्पूर्ण क्रांति की अलख जगाने के 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उस दिन पटना के इस मैदान से एक विशाल जनसमूह से लोकनायक ने कहा था, हम एक सम्पूर्ण क्रांति चाहते हैं, इससे कम कुछ नहीं। पांच दशक बाद इसी मैदान के सामने एक चौराहे पर बनी लोकनायक की भव्य मूर्ति पर पटना जिला प्रशासन ने पुष्पांजलि अर्पित की।

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प्रतिमा के चबूतरे पर लोकनारायण और उनके सामाजिक न्याय के संघर्ष पर कवि रामधारी सिंह दिनकर की लिखी कुछ पंक्तियां, सेनानि करो प्रयाण अभय, भावी इतिहास तुम्हारा है; ये तख्त आभा के बुझाते हैं, सारा आकाश तुम्हारा है... अंकित हैं। तब से अब तक उनके सपने और उस ऐतिहासिक पल को बीते हुए पांच दशक हो गए हैं। इसके बाद बिहार की राजधानी में बहुत कुछ बदल गया है। अब जेपी के मूल्य और उनके सिद्धांत महज राजनीतिक भाषणों, मूर्तियों और पुलों, मार्गों, सार्वजनिक भवनों, संस्थानों और राज्य की कुछ सड़कों के नामों में जीवित है। जेपी नारायण लोकतंत्र को दोष मुक्त करना चाहते थे। इसी के लिए तेजतर्रार जेपी के नेतृत्व में बिहार के आंदोलन ने सम्पूर्ण क्रांति का रूप लिया था। इसमें राज्य के तत्कालीन गफूर मंत्रिमंडल के इस्तीफे की शुरुआती मांग आखिरकार इंदिरा गांधी सरकार को बर्खास्त करने की एक बड़ी मांग में तब्दील हो गई।

केवल विधानसभा को भंग होते देखने के लिए नहीं आए
सुधीर कुमार झा ने अपनी किताब, ए न्यू डॉन : पटना रीइनकार्नेटेड में जेपी आंदोलन के बारे में लिखा है कि 5 जून, 1974 को नारायण ने गांधी मैदान में एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि यह एक क्रांति है, दोस्तों! हम यहां केवल विधानसभा को भंग होते देखने के लिए नहीं आए हैं। यह हमारे सफर में केवल मील का एक पत्थर है, लेकिन हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है। आजादी के 27 साल बाद भी इस देश के लोग भूख, बढ़ती कीमतों, भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। यह एक संपूर्ण क्रांति है, इससे कम कुछ नहीं। इस किताब में जेपी के ऐतिहासिक भाषण का जिक्र करते हुए बताया गया है कि कैसे पटना में सम्पूर्ण क्रांति के आह्वान के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन बाद में दिल्ली तक फैल गया।
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जेल से लिखा पत्र-माई डियर प्राइम मिनिस्टर..
वह बिहार आंदोलन ही था, जिससे 70 के दशक के उथल-पुथल भरे दौर में आपातकाल लागू हुआ और कभी इंदिरा को माई डियर इंदु कहकर संबोधित करने वाले जेपी उन्हें जेल से लिखे पत्र में उन्हें माई डियर प्राइम मिनिस्टर कहने को मजबूर हुए।

हर तरफ जेपी का नाम
पटना में शहर के बीचों-बीच आयकर चौराहे पर जेपी की दूसरी बड़ी मूर्ति है। शहर का हवाईअड्डा, कुछ साल पहले बनकर तैयार हुए नए गंगा पुल का नाम जेपी सेतु है। विवि डाकबंगले सड़कें उनके नाम पर हैं।

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