हिंदी भाषा सहोदरी के दीपक शुक्ला ने अमर उजाला को बताया कि प्रयोग में सुगमता और आसानी से समझ में आने के कारण हिंग्लिश आज लोगों की पहली पसंद बन गई है। कंप्यूटर, लैपटॉप से लेकर मोबाइल तक में हिंदी में टाइपिंग करना मुश्किल भरा काम होता है, जबकि अंग्रेजी के अक्षरों का इस्तेमाल करते हुए हिंदी भाषा में ही अपनी बात रखना ज्यादा आसान होता है। यही कारण है कि लोग हिंदी भाषा के शब्दों को भी अंग्रेजी के अक्षरों में लिख रहे हैं।
अंग्रेजी भाषा के स्कूलों में बढ़कर बॉलीवुड की हिंदी फिल्मों में काम करने वाले कलाकार बोलने के लिए तो हिंदी बोल लेते हैं, लेकिन ज्यादातर कलाकारों को हिंदी भाषा पढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए वे अपनी हिंदी की स्क्रिप्ट को भी अंग्रेजी के अक्षरों में लिखकर दिए जाने की मांग करते हैं। ठीक यही बात सोशल मीडिया पर भी लागू होती है।
आज हमारे देश की एक बड़ी आबादी अपने बच्चों को अंग्रेजी के स्कूलों में पढ़ा रही है। ये बच्चे अंग्रेजी में बेहतर समझ रखते हैं, लेकिन आपसी बातचीत में हिंदी का ज्यादा प्रयोग होने के कारण वे हिंग्लिश का प्रयोग करते हैं। हिंदी भाषा के बीच में हिंदी के शब्दों की अंग्रेजी का चलन इतना सामान्य हो गया है कि कई बार इन शब्दों के हिंदी के ही शब्द होने का आभास होने लगता है।
हिंदी के लिए खतरा या सहायक
दीपक शुक्ला का मानना है कि हिंदी इतनी मजबूत और लोकप्रिय भाषा है कि किसी दूसरी भाषा के असर के कारण इसका कोई नुकसान नहीं हो सकता। उलटे दूसरी भाषाओं के कुछ शब्दों के इसके साथ मिल जाने से यह समृद्ध ही होती है। उन्होंने कहा कि हिंग्लिश के उपयोग के कारण ही सोशल मीडिया पर हिंदी और अधिक लोकप्रिय हो रही है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।