समिति ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर 13 नवंबर को सुनवाई करने का फैसला किया। वहीं, राज्य सरकार फैसले के खिलाफ जन आंदोलन को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है। पुलिस बल का इस्तेमाल कर फैसले को लागू कराने पर आमादा है। समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।