आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की हत्या मध्य प्रदेश के देवास में 29 दिसंबर 2007 को की गई थी। जोशी की हत्या का मामला भी 2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया था ताकि देश में उस वक्त कथित 'भगवा आतंकवाद' के आरोपों की जांच की जा सकें। इस मामले में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ीं प्रज्ञा ठाकुर सहित हर्षद सोलंकी, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार, आनंदराज कटारिया, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और जितेंद्र शर्मा को आरोपी बनाया गया था। इन सभी पर हत्या, साक्ष्य छुपाने और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। लेकिन जोशी की हत्या के मामले में कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सहित आठ अभियुक्तों को फरवरी, 2017 में बरी कर दिया। यह फैसला देवास में एडीजे राजीव कुमार आप्टे ने सुनाया था।
समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट
भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत के नजदीक धमाका हुआ था। इस धमाके में 68 लोग मारे गए थे और 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। मरने वालों में 16 बच्चे और चार रेलवेकर्मी भी शामिल थे। इस धमाके में मरने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे। 26 जुलाई, 2010 में जब ये मामला एनआईए को सौंपा गया था तब जांच एजेंसी ने दावा किया था कि उनके पास दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और वो ही इस मामले में मास्टरमाइंड थे।
जांच एजेंसी का कहना था कि ये सभी अक्षरधाम (गुजरात), रघुनाथ मंदिर (जम्मू), संकट मोचन (वाराणसी) मंदिरों में हुए इस्लामी आतंकवादी हमलों से दुखी थे और 'बम का बदला बम से' लेना चाहते थे। इन धमाकों के सिलसिले में आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार से भी पूछताछ की गई थी। पहली चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद के साथ-साथ सुनील जोशी, रामचंद्र कालसंग्रा, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का भी नाम था। इनपर आरोप था कि इन्होंने मिलकर ही देसी बम तैयार किए थे।
सीबीआई ने 2010 में उत्तराखंड के हरिद्वार से असीमानंद को गिरफ्तार किया गया था और असीमानंद के खिलाफ मुकदमा उनके इकबालिया बयान के आधार पर ही बनाया गया था लेकिन बाद में वो ये कहते हुए अपने बयान से मुकर गए कि उन्होंने वो बयान टॉर्चर की वजह से दिया था। इस मामले की सुनवाई धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है क्योंकि एनआईए को पाकिस्तान के उन 13 गवाहों का इंतजार है जो इन धमाकों के चश्मदीद रहे।
महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में 8 सितंबर 2006 को जुमे की नमाज के ठीक बाद कुछ धमाके हुए और इनमें 37 लोगों की मौत हुई। मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने इस मामले की जांच की और सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसमें दो पाकिस्तानी नागरिकों का नाम भी था। लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में एटीएस और सीबीआई के दावे गलत साबित हुए। एनआईए ने अपनी जांच के अनुसार चार लोगों को गिरफ्तार किया जिनके नाम थे लोकेश शर्मा, धन सिंह, मनोहर सिंह और राजेंद्र चौधरी। इसी दौरान मालेगांव शहर के अंजुमन चौक तथा भीकू चौक पर 29 सितंबर 2008 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए जिनमें 6 लोगों की मौत हुई और 101 लोग घायल हुए थे। रमजान के महीने में हुए इन धमाकों की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते ने की थी। उनके मुताबिक, इन धमाकों में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी जिसके बारे में ये खबरें आईं थीं कि वो मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर थी।
दक्षिणपंथी संस्था का नाम
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मालेगांव ब्लास्ट को कथित तौर पर अभिनव भारत नामक दक्षिणपंथी संस्था ने अंजाम दिया था। इस मामले में अभियुक्त बनाए गए कर्नल श्रीकांत पुरोहित का संबंध इस संस्था से बताया गया था। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात अन्य लोग अभियुक्त थे। बाद में इस मामले की जांच की जिम्मेदारी एनआईए को सौंप दी गई थी। एनआईए ने भी कहा था कि कर्नल पुरोहित ने गुप्त बैठकों में हिस्सा लेकर धमाकों के लिए विस्फोटक जुटाने की सहमति दी थी। हालांकि पुरोहित कोर्ट में खुद के राजनीति का शिकार होने का दावा पेश करते रहे। 13 मई 2016 को एनआईए ने नई चार्जशीट फाइल की। इसमें रमेश शिवाजी उपाध्याय, समीर शरद कुलकर्णी, अजय राहिरकर, राकेश धावड़े, जगदीश महात्रे, कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी दयानंद पांडे सुधाकर चतुर्वेदी, रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया गया।
इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, शिव नारायण कालसांगरा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा, धानसिंह चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पुख्ता सबूत नहीं होने का दावा किया। अप्रैल 2017 में बांबे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दे दी, लेकिन कोर्ट ने श्रीकांत पुरोहित को जमानत नहीं दी।
अगस्त 2017 में कर्नल पुरोहित 9 साल बाद जेल से बाहर आए। लेकिन ज्यादा चर्चा इस बात पर हुई कि जब कर्नल पुरोहित जेल से निकले तो सेना की तीन गाड़ियां उन्हें जेल से लेने पहुंचीं। दिसंबर 2017 में मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर से मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून) हटा लिया गया है। दोनों पर अब यूएपीए और आईपीसी के तहत मुकदमा चल रहा है।