हम हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं- उद्धव ठाकरे
इसके बाद शिवसेना यूबीटी के नेताओं की तरफ से इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा, छोड़ो दुबे बिबे... ऐसे कई लकड़बग्घे हैं जो विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे यहां सब खुश हैं, इनके पास ध्यान देने की जरूरत नहीं है। हमारी महाराष्ट्र की जनता सब जानती है।
ठाकरने कहा कि 'हम हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन कुछ लोग मराठी लोगों की तुलना पहलगाम के आतंकवादियों से कर रहे हैं- असली मराठी विरोधी वही लोग हैं। ये लोग ना तो मराठियों का भला चाहते हैं और ना ही हिंदुओं को बचा सकते हैं। ये हमेशा उन लोगों के साथ खड़े रहते हैं जो मराठी समाज के साथ अन्याय करते हैं। पहले जो असली भाजपा थी, जिसने शिवसेना के साथ गठबंधन किया था - अब वो भाजपा खत्म हो गई है। अब हम (विपक्षी दल) एक साथ आ गए हैं, और तभी से ये लोग गुस्से में हैं।'
फूट डालो और राज करो भाजपा की चाल- आदित्य
वहीं शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने कहा, 'यह बिल्कुल भाजपा की मानसिकता है, जो महाराष्ट्र विरोधी है। हमने सभी से कहा है कि ऐसे पागल और गंदे दिमागों पर प्रतिक्रिया न करें क्योंकि वे महाराष्ट्र में भय और अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं। ये वही लोग हैं जो महाराष्ट्र में विभाजन पैदा करना चाहते हैं, और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे... फूट डालो और राज करो भाजपा की चाल है... यह शुद्ध राजनीति है... भाजपा के सांसद की यह मानसिकता पूरी भाजपा का प्रतिनिधित्व करती है, यह उत्तर भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करती। पूरे देश से लोग सपने और उम्मीदें लेकर महाराष्ट्र आते हैं... हमारी लड़ाई सरकार के खिलाफ है, किसी भाषा के खिलाफ नहीं... निशिकांत दुबे उत्तर भारत के प्रतिनिधि नहीं हैं'।
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कांग्रेस बच्चों को भ्रमित करने के खिलाफ- अतुल लोंधे पाटिल
वहीं मराठी भाषा विवाद पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर महाराष्ट्र कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंधे पाटिल ने कहा, 'वह मूर्ख हैं। यह विवाद भाषा को लेकर नहीं है। यह इस बारे में है कि क्या उनकी मातृभाषा के अलावा दो अन्य भाषाएं हैं 'पहली से चौथी कक्षा तक के बच्चों को मातृभाषा सिखाई जानी चाहिए...बच्चे भ्रमित हो सकते हैं - इसी बात पर विवाद है। कांग्रेस सभी भाषाओं का सम्मान करती है, लेकिन वह 'बालशास्त्र' से भटकने और बच्चों को भ्रमित करने के खिलाफ है। देश का कोई भी राज्य या भाषा हो, पहली से चौथी कक्षा तक मातृभाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए'।