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#हिंदीहैंहम: हिंदी को बढ़ावा देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल और रोजगार से जोड़ना जरूरी

Fri, 18 Sep 2020 11:37 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हिंदी भाषा के गौरव और उत्थान को कैसे वापस लाएं’ विषय पर चर्चा का आयोजन
  • हिंदी समावेशी है और सभी को एक सूत्र में जोड़कर रखती है, बॉलीवुड का अहम योगदान
  • इंटरनेट की शक्ति से भारतीय भाषाओं को मिला बढ़ावा
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हिंदी हैं हम वेबिनार - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान #हिंदीहैंहम के तहत शुक्रवार को वेबिनार के माध्यम से जाने-माने दिग्गजों ने ‘हिंदी भाषा के गौरव और उत्थान को कैसे वापस लाएं’ विषय पर चर्चा की। संवाद को अमर उजाला के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर भी हजारों लोगों ने लाइव देखा। छोटे शहरों और मध्यवर्गीय परिवार में असीम प्रतिभाएं हैं। हिंदी स्वाभिमान की भाषा है। अंग्रेजीकरण पर अधिक जोर होने की वजह से युवाओं में आत्मविश्वास की कमी देखने को मिलती है और वे अपनी बात कहने में झिझकते हैं। हिंदी भाषा में संवाद की आजादी है। सिनेमा ने भारतीय समाज में हिंदी को समृद्ध बनाया है। हिंदी के लिए यह गौरव की बात है कि डोनाल्ड ट्रंप और डेविड कैमरन जैसे दुनिया के बड़े नेता अपने चुनाव प्रचार में हिंदुस्तानियों को रिझाने के लिए हिंदी नारे का प्रयोग करते रहे हैं।

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सुनहरा है हिंदी का भविष्य, अपार संभावनाएं
छोटे शहरों और मध्यवर्ग के लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं हमें हिंदी भाषा में उपलब्ध करानी होंगी। इसका सीधा संबंध हमारी अर्थव्यवस्था से है। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को सम्मान दिलाने के लिए सराहनीय प्रयास किए गए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी हमें बड़े बदलाव की जरूरत है, इससे रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। टेलीविजन के आने से हिंदी भाषा का महत्व निश्चित ही बढ़ा है। विज्ञापन जगत में हिंदी भाषा का वर्चस्व कायम है। हिंदी की गाड़ी वास्तव में चल पड़ी है। अब पीछे मुड़कर नहीं देखना है, हिंदी का भविष्य सुनहरा है। - शशि सिन्हा, सीईओ, आईपीजी मीडिया ब्रांड्स इंडिया

पलक झपकते ही अपनी भाषा में बोलकर लिख पाते हैं
हिंदी का साहित्य समृद्ध है, लेकिन सिर्फ साहित्य के बल पर ही राष्ट्र की उन्नति नहीं हो सकती है। भावना सिर्फ नारों से नहीं आती, हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए संभावनाओं की भाषा बनाना होगा। इंटरनेट से कई संभावनाएं पैदा हुई हैं। आधुनिक युग में हर व्यक्ति के हाथ में कम्प्यूटर की शक्ति है, जहां पलक झपकते ही बोलकर लिख पाते हैं और अनुवाद सहज तरीके से कर पाते हैं। लंबे समय तक विदेशी आधिपत्य होने के कारण हमारी मानसिकता पर गहरा असर पड़ा है, हमें स्वयं को ज्यादा महत्वाकांक्षी बनाना है। हिंदी को सेवा प्रदाताओं की श्रेणी में लाना होगा। -बालेंदु शर्मा दाधीच, निदेशक स्थानीय भाषा और सुगम्यता, माइक्रोसॉफ्ट
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अनुभव से जाना भाषा का महत्व
ज्यादातर लोगों के लिए सफलता की परिभाषा नौकरी तक ही सीमित रह जाती है। जब आप बचपन में ही किसी बच्चे को डरा देते हैं और उसे हिंदी बोलने पर दंड देते हैं तो बच्चे का लगाव अपनी भाषा के प्रति कम हो जाता है और उसे बहुत कम उम्र में ही अहसास हो जाता है कि ये भाषा ज्यादा जरूरी नहीं है, अंग्रेजी ज्यादा महत्वपूर्ण है। अंग्रेजी की अनिवार्यता बहुत ही गलत बात है। जीवन के अनुभव के साथ मैंने भाषा के महत्व को जाना। आज हिंदी भाषा के लेखकों की कमी को महसूस करता हूं। हिंदी समावेशी है, सभी को एक सूत्र में जोड़कर रखती है, विदेशों में भी हिंदी का मान बढ़ा है। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने में बॉलीवुड का अहम योगदान रहा है। तकनीकी युग में हिंदी भाषा को अधिक बढ़ावा मिल रहा है। - आर. माधवन, अभिनेता-निर्देशक
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