मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भारतीय रेल तेजी से निजीकरण की ओर बढ़ रही है। सरकार इसे जहां पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में एक बड़ा कदम बता रही है, वहीं यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण बता रही है। यही कारण है कि रेलवे में निजी निवेशकों को लुभाने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
इसी कड़ी में केंद्र सरकार की तरफ से एक बड़ा फैसला किया गया है। समाचार एजेंसी के मुताबिक निजी कंपनियों को अपने तरीके से रेल का किराया तय करने की छूट होगी। भारतीय रेल बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने बृहस्पतिवार को बताया कि निजी कंपनियां अपने तरीके से किराया तय कर पाएंगी। हालांकि उन रूट पर अगर एसी बसें और प्लेन की भी सुविधा है, तो किराया तय करने के पहले कंपनियों को इस बात का ध्यान रखना होगा। वीके यादव ने कहा कि भारतीय रेल की इन परियोजनाओं में निवेश के लिए एल्सटॉम, बॉम्बार्डियर, जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्टर और अडानी इंटरप्राइजेज जैसी निजी कंपनियों ने रुचि दिखाई है।
रेल मंत्रालय के एक अनुमान के अनुसार, ये परियोजनाएं अगले 5 साल में 7.5 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश ला सकती हैं। 2023 तक देश की पहली बुलेट ट्रेन बनाने के लिए जापान से कम लागत के लोन पर दांव लगा रहे मोदी के लिए रेलवे का आधुनिकीकरण करना काफी महत्वपूर्ण है।
सरकार ने यात्री ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। भारत ने इस रेलवे परियोजना में रूचि रखने वाली कंपनियों को जुलाई में 151 ट्रेनों के माध्यम से 109 ओरिजिन डेस्टिनेशनल पर यात्री ट्रेनें चलाने के लिए अपनी रुचि प्रस्तुत करने के लिए कहा था।