स्कूल-कॉलेज से लेकर कई कार्यक्रमों में आपने भारत माता की तस्वीर तो जरूर देखी होगी। लेकिन, अगर यह पूछा जाए कि भारत माता की पहली तस्वीर कब बनी थी और किसने बनाई थी तो शायद की कोई इसका जवाब दे पाए।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसकी चर्चा गांवों से लेकर महलों तक होती थी। कहा जाता है कि हिंद देवी की तस्वीर से प्रभावित होकर महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने साल 1930 में प्रसिद्ध गीत 'अयि भूवनमनो मोहिनी' की रचना की थी। अरविंद घोष ने इस तस्वीर के बारे में कहा था कि हिंद देवी की यह तस्वीर आजादी की लड़ाई में प्रेरणा देती है। वहीं, गुजरात के संत स्वामी आनंद ने अपनी पुस्तक 'संतोना अनुज' में लिखा था कि क्रांतिकारी कृपाशंकर पंडित और डॉ. हरिप्रसाद देसाई की प्रेरणा से मगनलाल शर्मा ने यह तस्वीर बनाई थी।
मगनलाल ने हिंद देवी की तस्वीर के जरिए पहली बार अखंड भारत की संकल्पना को साकार स्वरूप दिया था। हालांकि, इससे पहले साल 1873 में किरण चंद्र बनर्जी ने 'भारत माता' नामक एक नाटक तैयार किया था, लेकिन उनके पास कोई तस्वीर नहीं थी।
भारत माता की तस्वीर की तरह ही भारत माता मंदिरों का भी निर्माण हुआ। देश के पहले भारत माता मंदिर का निर्माण साल 1936 में काशी (वाराणसी) में हुआ था। यहां पहले अभिषेक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया था। इस मंदिर का निर्माण बाबू शिव प्रसाद गुप्ता ने करवाया था। इस मंदिर के मुख्य द्वार पर पत्थरों से भारत का नक्शा बना हुआ है।
बाबू शिव प्रसाद गुप्ता ने 1936 में काशी में भारत माता का मंदिर बनवाया था। यहां पहला अभिषेक महात्मा गांधी ने किया। इस मंदिर के मुख्य द्वार पर ही मार्बल से भारत का नक्शा बना हुआ है। वाराणसी के इंग्लिशिया लाइन और सिगरा चौराहे के बीच सिथित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के परिसर में यह मंदिर स्थित है। इसके निर्माण में करीब 10 लाख रुपये की लागत आई थी।