कांग्रेस पार्टी के नेता अपनी जनसभाओं में यह आश्वासन दे रहे हैं कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो बिना किसी देरी के पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू कर दी है। भाजपा के मुख्यमंत्रियों के लिए यह मुद्दा, गले की फांस बना हुआ है। वे इस पर खुल कर कुछ नहीं बोलते। केवल इतना कह देते हैं कि इस परप्रधानमंत्री मोदी ही कोई निर्णय ले सकते हैं। हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर यह बात मानते हैं कि चुनाव में यह एक मुद्दा है। हालांकि वे इसे अपने तरीके से परिभाषित करने लगते हैं। वे कहते हैं कि भाजपा के कार्यकाल में युवाओं को भरपूर सरकारी नौकरियां मिली हैं। सरकारी एवं निजी क्षेत्र में रोजगार उत्पन्न करने का ग्राफ देखें तो दोनों पार्टियों की तुलना में भाजपा, कांग्रेस को बहुत पीछे छोड़ चुकी है।
वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में खत्म हुई थी ओपीएस
मीडिया के एक सवाल के जवाब में ठाकुर ने कहा, प्रियंका गांधी को यह नहीं भूलना चाहिए कि पुरानी पेंशन स्कीम को कांग्रेस सरकार ने ही खत्म कर दिया था। कांग्रेस को इसके लिए सरकारी कर्मचारियों से माफी मांगनी चाहिए। केंद्र ने जब पहली जनवरी 2004 से पुरानी पेंशन को खत्म कर एनपीएस लागू किया, तो उस वक्त प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह थे। उन्होंने ओपीएस को समाप्त किया था। प्रियंका द्वारा किए गए वादे के बारे में जयराम ठाकुर ने कहा, उन्हें पहले कांग्रेस शासित राज्यों में ओपीएस का अध्ययन करना चाहिए। वे खुद भी जानती हैं कि ओपीएस को लागू करना मुश्किल है।
चूंकि हिमाचल प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है, तो सीएम ठाकुर इस मुद्दे पर 'एकतरफा' होने का नतीजा जानते हैं, इसलिए वे इस मुद्दे को घुमा देते हैं। वे कहते हैं, सरकारी कर्मचारियों ने भाजपा का साथ दिया है। कर्मचारियों को ये भी मालूम है कि पुरानी पेंशन योजना दोबारा तभी लागू हो सकती है, जब राज्य में भाजपा को दोबारा से मौका दिया जाए। केंद्र की सलाह से ही यह निर्णय लेना संभव होगा। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के लिए दशकों तक केंद्र की सत्ता में आने ख्वाब देखना बेमानी है। हिमाचल के कर्मचारी, कांग्रेस पार्टी के बहकावे में नहीं आएंगे।