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Himachal Pradesh Election 2022: कांग्रेस का यह है मिशन हिमाचल! भाजपा की रणनीति पर बनाया गोलबंदी का ऐसा प्लान

सार

कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अभी तो सिर्फ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को पार्टी में शामिल कराया गया है। उनका कहना है कि अगले कुछ दिनों में भाजपा के कुछ अन्य वरिष्ठ नेता भी पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में यह जरूर बताया कि उप-चुनावों में जिन जिलों में भाजपा हारी थी वहां के कई नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं...
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खीमी राम कांग्रेस में शामिल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अगले कुछ महीनों में होने वाले हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने बड़ी गोलबंदी की तैयारियां कर ली है। कांग्रेस के स्थानीय और केंद्रीय नेताओं की मुख्य टीम के जिम्मेदारों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश के कई नाराज भाजपा नेताओं की उनकी पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाकात हो चुकी हैं। इन्हीं मुलाकातों के परिणामों के चलते हिमाचल प्रदेश में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पंडित खीमीराम कांग्रेस में शामिल हुए हैं। कांग्रेस आलाकमान से जुड़े करीबी नेताओं के मुताबिक भाजपा के कई और नेता पार्टी में शामिल होने के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अचानक बढ़ी हलचल के चलते पार्टी ने प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला के नेतृत्व में कांग्रेस ने भाजपा को उनकी रणनीति के मुताबिक ही घेरने का मिशन हिमाचल का प्लान तैयार किया है।

इस बार बदल सकता है हिमाचल के वोटरों का नजरिया

कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से भाजपा के कई नाराज बड़े नेताओं से संपर्क किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि इस बार हिमाचल के वोटरों का नजरिया बदला हुआ दिख रहा है। उन्होंने बताया कि भाजपा के कई कद्दावर नेता कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं से न सिर्फ मिल रहे हैं, बल्कि कई लोग मिलकर पार्टी में शामिल भी होना चाह रहे हैं। वह कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश में हुए उपचुनावों के नतीजे और उसके बाद उनकी पार्टी में लगातार जुड़ रहे लोगों से संदेश साफ झलक रहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक पार्टी ने इसी रुझानों को देखते हुए माइक्रो लेवल पर बड़ी प्लानिंग शुरू की है। वह कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने माइक्रो लेवल पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बीते काफी समय से मजबूत करना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि पार्टी न सिर्फ अपने कार्यकर्ताओं कुछ जोड़कर आगे चल रही है, बल्कि सत्ता पक्ष के लोग भी कांग्रेस के साथ जुड़ना चाह रहे हैं।

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पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पंडित खीमीराम को कांग्रेस में शामिल कराने के साथ उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की भी तैयारी चल रही है। हालांकि जिम्मेदारी किस तरीके की होगी, इसे लेकर कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी कोई खुलासा नहीं हुआ है। लेकिन इतना तय है कि खीमीराम को बड़े आश्वासन के साथ पार्टी में शामिल कराया गया है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अभी तो सिर्फ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को पार्टी में शामिल कराया गया है। उनका कहना है कि अगले कुछ दिनों में भाजपा के कुछ अन्य वरिष्ठ नेता भी पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात का खुलासा तो नहीं किया कि भाजपा के कौन से नेता उनके संपर्क में हैं, लेकिन इशारों-इशारों में यह जरूर बताया कि उप-चुनावों में जिन जिलों में भाजपा हारी थी वहां के कई नेता कांग्रेस के संपर्क में हैं।

माइक्रो स्तर पर संगठन को मजबूती

पार्टी आलाकमान ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह और प्रदेश प्रभारी सांसद राजीव शुक्ला के नेतृत्व में माइक्रो स्तर पर संगठन को मजबूत करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में उदयपुर चिंतन शिविर के बाद पार्टी के नए संगठनात्मक स्वरूप के लिहाज से गठन भी शुरू कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि उनकी पार्टी ने जिस तरीके से ब्लॉक स्तर और ग्रामीण स्तर पर अपनी पार्टी के संगठन को हिमाचल प्रदेश में खड़ा करना शुरू किया है, वह यह तस्दीक करता है कि आने वाले विधानसभा के चुनावों में उनकी जीत होनी तय है। वे कहते हैं कि योजना के अनुसार पार्टी के हर ब्लॉक अध्यक्ष से लेकर माइक्रो स्तर पर बनाए जाने वाले संगठनात्मक ढांचे के मुखिया को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह कम से कम से 10 नए सदस्य अगले कुछ दिनों में जोड़कर संगठन को बड़ा स्वरूप दे।

अगले कुछ दिनों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस के ही नेताओं में तमाम तरह की शंकाएं पैदा हो रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि हमेशा की तरह कांग्रेस अगर चुनाव से पहले कुछ बड़ी गलतियां नही करेगी तभी चुनाव के नतीजे उसके पक्ष में जा सकते हैं। वह कहते हैं कि लेकिन पार्टी में अंदरूनी कलह इतनी ज्यादा मची हुई है कि कई बार सब कुछ ठीक होने के बाद भी अंतिम समय में सारी रणनीति फेल हो जाती है। इसलिए पार्टी आलाकमान को न सिर्फ अंदरूनी कलह को रोकने के लिए तमाम प्रयास करने होंगे, बल्कि इसकी भरकस कोशिश करनी होगी कि दिल्ली और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस नेताओं के बीच में कोई कम्युनिकेशन गैप न हो।

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