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Himachal Pradesh Election: हिमाचल प्रदेश में चुनाव का एलान, जानें राज्य के ताजा समीकरण, कौन हो सकता है CM?

Fri, 14 Oct 2022 03:58 PM IST
हिमांशु मिश्रा इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पिछली बार हिमाचल प्रदेश में नौ नवंबर को एक ही चरण में चुनाव हुआ था, जबकि गुजरात में नौ और 14 दिसंबर को दो चरणों में वोटिंग हुई थी। 18 दिसंबर को दोनों राज्यों के चुनाव नतीजे आए थे। 
 
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Himachal Pradesh Assembly Election 2022 - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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चुनाव आयोग ने आज हिमाचल प्रदेश की चुनावी तिथियों का एलान कर दिया। 12 नवंबर को एक चरण में मतदान होगा। इसके लिए 17 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी। मतगणना आठ दिसंबर को होगी। आयोग ने अभी गुजरात चुनाव के लिए कुछ भी एलान नहीं किया है। बताया जा रहा है कि दिपावली के बाद गुजरात चुनाव की तिथियों की घोषणा होगी। पिछली बार नौ नवंबर को हिमाचल में चुनाव हुए थे, जबकि 18 दिसंबर को मतगणना हुई थी। 
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हिमाचल प्रदेश चुनाव का शेड्यूल
अधिसूचना : 17 अक्तूबर
नामांकन की आखिरी तारीख : 25 अक्तूबर
नामांकन की जांच : 27 अक्तूबर
नाम वापसी: 29 अक्तूबर
मतदान: 12 नवंबर 
मतगणना : 08 दिसंबर

आइए जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश में पांच साल के अंदर क्या-क्या बदला? मौजूदा राजनीतिक स्थिति क्या है? राज्य के मुद्दे क्या हैं? कौन सा दल किसे चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा जा रहा है? मुकाबला किन-किन पार्टियों के बीच है? मुख्यमंत्री पद के दावेदार कौन-कौन हैं?  
 

चुनाव से जुड़ी अहम बातें
  • 7811 पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। 
  • 55 लाख 07 हजार 261 वोटर्स डाल सकेंगे वोट। 
  • एक लाख 86 हजार 681 वोटर्स पहली बार वोट डालेंगे। 
  • दो लाख 78 हजार 208 पुरुष और दो लाख 72 हजार 16 महिला वोटर्स हैं।
  • सभी उम्मीदवारों को अपने आपराधिक इतिहास की जानकारी देनी होगी। 

पहले जानिए मौजूदा राजनीतिक स्थिति क्या है? 
हिमाचल प्रदेश में कुल 68 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में चुनाव के दौरान भाजपा 44 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 21, सीपीआई (एम) को एक सीट मिली थी। दो निर्दलीय प्रत्याशी भी विधायक बने थे, जिन्होंने भाजपा सरकार को समर्थन दे दिया था। बाद में कुछ सदस्यों के निधन के बाद उपचुनाव भी हुए, जिसके बाद सियासी समीकरण में थोड़ा बदलाव हुआ। अभी भाजपा के 43 विधायक हैं और दो निर्दलीयों का भी सरकार को समर्थन है। इसके अलावा कांग्रेस के पास 22 और सीपीआई (एम) के पास एक सीट है। भाजपा के जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री हैं। पिछले पांच साल में हिमाचल में तीन उपचुनाव हुए। तीनों में सत्ताधारी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। 

राज्य के चुनावी मुद्दे क्या-क्या हैं? 
कुछ मुद्दे हैं, जिसे लगातार विपक्षी दल उठा रहे हैं। पहला मुद्दा किसानों का है। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए जोरशोर से ये मुद्दा उठाया है। आरोप है कि मौजूदा केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। इसके चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर किसान बर्बाद हो गए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ कर देती है, लेकिन किसानों का नहीं। इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी का मुद्दा भी दोनों राज्यों में विपक्ष उठा रहा है।

वहीं, दूसरी ओर भाजपा ने विकास के साथ राष्ट्र सुरक्षा, आम लोगों की सहूलियत, गरीबों-किसानों को मजबूत बनाने के मुद्दे पर चुनावी मैदान पर उतरने का फैसला लिया है। भाजपा हर जगह अपने विकास कार्यों की गिनती करा रही है। एम्स, आईआईटी जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को बनाने की बात कह रही है। हाईवे, पुल, अंडर ब्रिज, टनल, मेट्रो जैसे अन्य कार्यों को बताकर लोगों से भाजपा के पक्ष में वोट करने की अपील की जा रही है। पिछले कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई योजनाओं को उद्धाघाटन और शिलान्यास भी किया है। 

किस चेहरे पर चुनाव लड़ रहे राजनीतिक दल? 
यहां भाजपा अपने मौजूदा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी। हालांकि, बड़ा चेहरा पीएम मोदी का ही होगा। जयराम ठाकुर के अलावा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंबेल सिंह कश्यप भी आगे हैं।

वहीं, कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह की अगुआई में चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। पिछले साल जुलाई में ही वीरभद्र सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद कांग्रेस ने उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना दिया था। 

वीरभद्र छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री थे। वीरभद्र के परिवार का आज भी हिमाचल में काफी दबदबा है। यही कारण है कि कांग्रेस ने इस बार प्रतिभा सिंह को कमान सौंप दी है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को चेहरा बनाया गया है। आम आदमी पार्टी ने भी पूरी ताकत लगा दी है। प्रदेश अध्यक्ष सुरतीज ठाकुर की अगुआई में आम आदमी पार्टी यहां चुनाव लड़ रही है। हालांकि, यहां भी बड़ा चेहरा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का ही होगा। 

सीएम पद के दावेदार कौन-कौन?
मौजूदा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भाजपा से सीएम पद की रेस में सबसे आगे हैं। अगर 2017 की तरह इस बार भी पार्टी को जीत मिलती है और कोई बड़ा उलटफेर नहीं होता है तो जयराम ठाकुर को फिर से सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी सीएम पद की रेस में शामिल हैं। लगातार वह इसके लिए कोशिश भी कर रहे हैं।

वहीं, कांग्रेस की ओर से प्रतिभा सिंह, मुकेश अग्निहोत्री, कौल सिंह ठाकुर, सुखविंद्र सिंह सुक्खू, रामलाल ठाकुर, आशा कुमारी सीएम पद के दावेदारों में हैं। पार्टी ने अब तक आधिकारिक तौर पर किसी भी चेहरे पर मुहर नहीं लगाई है।
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किनके-किनके बीच मुकाबला है
सूबे में शुरू से मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रही है। 1983 से अब तक के आंकड़े देखें तो पांच साल भाजपा और पांच साल कांग्रेस ने प्रदेश पर राज किया है। हालांकि, इस बीच लंबे समय तक कांग्रेस के वीरभद्र सिंह ही मुख्यमंत्री रहे। अब उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह कांग्रेस की अगुआई कर रहीं हैं। वहीं, भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुआई में पार्टी चुनावी मैदान में है। ऐसे में मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच बताया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
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