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हिमाचल चुनावः मुद्दों की अजब लड़ाई, भाजपा स्थानीय तो कांग्रेस राष्ट्रीय मुद्दों पर लगा रही दांव

Sat, 04 Nov 2017 12:45 PM IST
हरेन्द्र सिंह मोरल, अमर उजाला डॉटकॉम
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हिमाचल चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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किसी राज्य के विधानसभा चुनावों में आमतौर पर स्‍थानीय मुद्दे ही हावी रहते हैं। इन्हीं मुद्दों को जनता और स्‍थानीय नेताओं के द्वारा हवा दी जाती है लेकिन हिमाचल प्रदेश के मौजूदा विधानसभा चुनावों में स्‍थानीय मुद्दे लगभग नदारद हैं। उसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि बिजली पानी और सड़क-परिवहन जैसी समस्याएं हिमाचल में ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं हैं। 
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अन्य राज्यों के मुकाबले हिमाचल में बिजली भरपूर है तो प्राकृतिक स्रोतों के चलते पानी की समस्या भी यहां नहीं है। सड़कें लगभग ठीक ठाक हालत में हैं हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत कई जगह खस्ता है लेकिन ज्यादातर जगह काम चल रहा है। अगर स्‍थानीय बड़ा मुद्दा कुछ है तो वो है बेरोजगारी और कानून व्यवस्‍था का। ले देकर इन्हीं मुद्दों पर नेताओं और पार्टियों द्वारा दांव लगाया जा रहा है।

 सबसे खास बात ये है कि पांच साल से सत्ता पर काबिज कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में तो स्‍थानीय मुद्दों को पूरी तरजीह दी लेकिन भाजपा के‌ खिलाफ चुनाव में मुख्य मुद्दा नोटबंदी, जीएसटी और महंगाई को बनाया। 
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जबकि दूसरी ओर भाजपा के बैनर पोस्टरों में स्‍थानीय मुद्दे हावी हैं जिनमें बड़ा मुद्दा कानून व्यवस्‍था और बेरोजगारी का है। मतलब साफ है, भाजपा यहां स्‍थानीय मुद्दों पर हवा बनाकर चुनाव लड़ रही है तो कांग्रेस राष्ट्रीय मुद्दों पर भाजपा को घेरकर वोटरों को रिझाने की ताक में है। 

हिमाचल चुनाव - फोटो : अमर उजाला
खास बात ये है कि भाजपा की ओर से जहां मुख्य निशाने पर सीएम वीरभद्र सिंह ही हैं वहीं कांग्रेस की ओर से भाजपा के मुख्यमंत्री उम्‍मीदवार प्रेम कुमार धूमल की जगह प्रधानमंत्री मोदी और उनकी नीतियों को निशाना बनाया जा रहा है। 

कांग्रेस के सभी बैनर पोस्टरों में प्रधानमंत्री मोदी पर ही निशाना साधा गया है। जिसमें जीएसटी और नोटबंदी के साथ ही बढ़ती महंगाई को मुद्दा बनाया गया है। कांग्रेस के एक ऐसे ही बैनर का मजमून देखिए, "दालों की कीमतें बढ़ाकर, गरीबों के पेट पर लात मारने वाले मांग रहे हैं हिमाचल से हिसाब, इन्हें 9 नवंबर को जवाब देगा हिमाचल"। 

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के चेहरे वाले कांग्रेस के एक और बैनर का मजमून भी कुछ ऐसा ही था, "कालेधन पर नोटबंदी को सर्जिकल स्ट्राइक का नाम देकर देश की जनता को सताने वाले मांग रहे हैं हिमाचल से हिसाब"। इसी तरह कांग्रेस के तमाम बैनर पोस्टरों में मुख्य निशाना प्रधानमंत्री मोदी पर ही है। दूसरी ओर भाजपा के निशाने पर सीधे-सीधे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह हैं। 
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हिमाचल चुनाव - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल में प्रचार की काम संभाल रहे भाजपा के तमाम नेता वीरभद्र सिंह को घेरने में ही लगे हुए हैं। जिनमें स्‍थानीय मुद्दों के अलावा राज्य की कानून व्यवस्‍था पर सरकार को घेरा जा रहा है। भाजपा की ओर से सबसे ज्‍यादा कोटखाई गैंगरेप के मुद्दे को तूल दिया जा रहा है जिससे स्‍थानीय लोगों का भी एक भावनात्मक जुड़ाव सा बना हुआ है। इसी मुद्दे पर हाल के दिनों में वीरभद्र सिंह सरकार को काफी बदनामी झेलनी पड़ी थी।

 भाजपा के रणनीतिकार जानते हैं कि जनता की भावना से जुड़े मुद्दों को तूल देकर उन्हें खुद से जोड़ा जा सकता है। यही कारण है कि पार्टी के बैनरों में भी गुड़िया मुद्दा छाया हुआ है। "अब की बार, गुड़िया मांगे सुरक्षा का अधिकार" थीम से जुड़े विभिन्न बैनर पोस्टर भाजपा के प्रचार में देखे जा सकते हैं।

भाजपा के मुख्यमंत्री उम्‍मीदवार प्रेम कुमार धूमल ने भी कोटखाई क्षेत्र में शुक्रवार को हुई रैली में गुड़िया प्रकरण पर सरकार को निशाना बनाया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की शुक्रवार को हुई कई रैलियों में यह मुद्दा छाया रहा। 
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