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हिमाचल चुनाव: धूमल के ऐलान से भाजपा के चुनावी अभियान को मिलेगी धार

Tue, 31 Oct 2017 10:31 PM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : ANI
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प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान को और धार मिलेगी। सूबे की सत्ता में आने की पार्टी की उम्मीदें पहले से ही थीं। लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने धूमल के नाम का ऐलान कर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दर्ज कराने का दांव चला है। शाह की कोशिश कांग्रेस पार्टी को ईकाई अंक में धकेलने की है। अब हिमाचल का मुकाबला धूमल बनाम विरभद्र सिंह के बीच होगा। 
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धूमल से भाजपा के प्रचार को मिलेगी नई ताकत 
धूमल के नाम के ऐलान के बाद भाजपा के प्रचार अभियान में तेजी दिखेगी। पार्टी के प्रचार सामग्रियों में धूमल अब पोस्टर ब्वॉय के रूप में नजर आएंगे। पीएम मोदी और अमित शाह के साथ अब धूमल का चेहरा पार्टी के प्रचार सामग्रियों में प्रमुखता से नजर आएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं को इस आशय के संदेश दिए जा चुके हैं। 

क्यों मजबूरी बने धूमल 
अमित शाह के जरिए धूमल के नाम के ऐलान के साथ ही सूबे के दूसरे बड़े नेता जेपी नड्डा को एकबार दोबारा से प्रदेश की भाजपाई राजनीति में मात खानी पड़ी है। नड्डा भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे। मगर आलाकमान ने अनुभवी धूमल में अपना विश्वास जताया है।
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वैसे प्रदेश में आाम जन से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच सारा हिमाचल डोल रहा है, धूमल-धूमल बोल रहा है सरीखे धूमल के पक्ष में नारे पहले से ही लग रहे थे। अब पार्टी ने धूमल के नाम को आगे कर उनके अनुभव और कार्यकर्ताओं की पुकार को तरजीह दिया है। धूमल का नेतृत्व पार्टी के अभियान को अवश्य ही नई उर्जा प्रदान करेगा। 

73 वर्षिय धूमल की हिमाचल में गहरी पकड़ 

- फोटो : ANI
यह 73 वर्षिय धूमल की गहरी पकड़ का ही नतीजा है कि भाजपा आलाकमान ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का दोबारा से उम्मीदवार बनाया है। एक तो भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच वे बेहद लोकप्रिय हैं। तो दूसरा विधायकों के बीच भी उनका दबदबा है। टिकट बंटवारे में भी भाजपा आलाकमान ने धूमल के लोगों को तरजीह दी थी। उनके नामांकन के दौरान करीब दर्जन भर वर्तमान विधायक मौजूद थे।

वैसे उन्हें विधानसभा का चुनाव लड़ाने वक्त ही तय हो गया था कि वे सूबे में पार्टी के चेहरा होंगे। मगर पार्टी ने तकनीकी वजहों से धूमल के नाम के ऐलान को ऐन वक्त तक रोके रखा। अब चुकी सूबे के विधानसभा चुनाव की वोटिंग 9 नवंबर को होनी है। तो भाजपा ने धूमल कार्ड को आगे कर कांग्रेस की रणनीति को धराशायी कर दिया है।

हालांकि अमित शाह ने दिल्ली में बीते दिनों अनौपचारिक चर्चा में इस बात के संकेत दे दिए थे कि हिमाचल दौरे के वक्त वे मुख्यमंत्री चेहरे के नाम पर मंथन करेंगे। सूत्र बताते हैं कि शाह ने सोमवार देर रात प्रदेश भाजपा नेताओं से मंत्रणा की उसके बाद उन्होंने मंगलवार सुबह पीएम मोदी से भी मामले में बातचीत की।

औपचारिकता पूरी करने के बाद शाह ने चुनावी रैली में धूमल के नाम का ऐलान कर दिया। हालांकि अमर उजाला ने इस आशय की खबर 18 अक्टूबर को दे दी थी कि धूमल भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में बने हुए हैं और चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी उनके नाम का ऐलान कर देगी। 
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धूमल के ऐलान में जातिय समीकरण भी बने कारण 

Amit Shah - फोटो : ANI
मुख्यमंत्री पद के लिए धूमल के नाम के ऐलान में पहाड़ी प्रदेश हिमाचल का जातिय संतुलन भी एक कारण रहा है। कांग्रेस के जरिए विरभद्र का चेहरा आगे किए जाने के बाद भाजपा को इस बात का डर सताने लगा की ठाकुर बिरादरी का एकमुश्त वोट कांग्रेस के पाले में न चला जाए।

इससे पार्टी की ऐतिहासिक जीत पर असर पड़ सकता था। हिमाचल की जातिय गणित को देखें तो सूबे में 28 प्रतिशत संख्या ठाकुरों की है। तो ब्राह्मण बिरादरी के लोगों की संख्या महज 20 प्रतिशत तक आंकी जाती है। ब्राह्णण चेहरे के रूप में जेपी नड्डा और शांता कुमार का नाम आता है। लंबे समय से दल के अंदर विरोध की राजनीति करने की वजह से शांता अब पार्टी के सर्वमान्य चेहरा नहीं रहे।

तो नड्डा ने भी अपनी पहचान महज संगठन के वफादार नेता के रूप में बनाई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सती भी अपनी नई छाप नहीं छोड़ पाए हैं। इसलिए इन चेहरों पर धूमल का चेहरा भारी पड़ा है। भाजपा आलाकमान ने अपने सबसे अनुभवी और मजबूत चेहरे पर विश्वास जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया है।

धूमल के ऐलान के साथ ही पार्टी अब 50 से ज्यादा सीटें जीतने का सपना पाल रही हैं। अब धूमल के सामने भी यह चुनौती है कि इतने कम समय में सूबे का सघन दौरा वे कर सकें। हालांकि उनके लिए उनके पुत्र अनुराग ठाकुर ने पहले से ही युवा कार्यकर्ताओं की फौज पूरे सूबे में तैयार कर रखी है। और जनता के बीच धूमल कोई नया नाम भी नहीं है। इसलिए धूमल को पार्टी आलाकमान की उम्मीदों पर खरा उतरने में कठिनाई भी नहीं होगी। 
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