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हिजाब विवाद: कर्नाटक हाईकोर्ट के जजों को धमकाने वाला रहमतुल्ला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, केस रद्द करने की अपील

Wed, 13 Apr 2022 02:29 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक हाईकोर्ट के जजों को धमकाने वाला आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में दी अपनी याचिका में कहा कि या तो मेरे खिलाफ दर्ज दोनों केस रद्द हों या बंगलुरू का केस भी मदुरई ट्रांसफर हो।
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सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI
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विस्तार
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हिजाब पर फैसला देने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के जजों को धमकाने वाला रहमतुल्ला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। उसने अपनी याचिका में कहा कि या तो मेरे खिलाफ दर्ज दोनों केस रद्द हों या बंगलुरू का केस भी मदुरई ट्रांसफर हो। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया और इसपर जवाब देने के लिए कहा है।

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रहमतुल्लाह पर जजों को धमकाने का आरोप
बता दें कि कुछ ही दिन पहले सोशल मीडिया पर तमिलनाडु के मदुरै का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में तमिलनाडु तौहीद जमात का सदस्य कोवई रहमतुल्लाह खुलेआम हिजाब पर फैसला सुनाने वाले जजों को धमकाता दिखा था। वीडियो में वो कह रहा था कि अगर जजों को कुछ होता है तो उसके जिम्मेदार वो खुद होंगे। इतना ही नहीं उसने ये भी कहा कि झारखंड में मॉर्निंग वॉक के दौरान गलत फैसला देने वाले जज की हत्या हुई थी। 

इस वीडियो के सामने आने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने जजों को धमकाने के मामले में कार्रवाई करते हुए कोवई रहमतुल्लाह और जमाल मोहम्मद उस्मानी को गिरफ्तार कर लिया था। गया है। इन दोनों आरोपितों पर अलग-अलग क्षेत्रों में FIR दर्ज हुई थी। दोनों की गिरफ्तारी शनिवार (19 मार्च) की रात में हुई है।
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क्या है हिजाब विवाद?
बता दें कि कर्नाटक में हिजाब विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब उडुपी के एक सरकारी स्कूल में कुछ छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसे लेकर देश के कई हिस्सों में काफी प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान आठ फरवरी को मांड्या में पीईएस कॉलेज के अंदर भगवा शॉल पहने लड़कों ने जयश्री राम के नारे लगाए। जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। जय श्री राम के नारे लगाती भीड़ के सामने 19 साल की मुस्कान खान ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए थे। इसके बाद मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा और हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि हिजाब इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है, इसलिए राज्य सरकार को इसे स्कूलों के अंदर यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।

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