भारत में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई फैसले किए जा रहे हैं। एक ओर चार पहिया वाहनों के लिए फास्टैग लगवाना अनिवार्य किया गया है तो दूसरी ओर यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए एक एप भी तैयार किया गया है। जानकारी के अनुसार यमुना एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए इस एप को जल्द ही अनिवार्य किए जाने की योजना है। इस एप का नाम है हाईवे साथी। यह एप यमुना एक्सप्रेसवे पर किसी हादसे की स्थिति में या वाहन चालकों को किसी तरह की कोई जरूरत पड़ने पर उन्हें मदद उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया है।
यह एप इसलिए तैयार किया गया है जिससे यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों की संख्या में कमी लाई जा सके और हादसा होने की स्थिति में जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके। अगर आपके स्मार्टफोन में यह एप इंस्टॉल है तो यमुना एक्सप्रेसवे पर पहुंचते ही आपके फोन का सर्वर एक्सप्रेसवे के सर्वर से जुड़ जाएगा। इससे आपके वाहन की हर गतिविधि की जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचती रहेगी। अगर किसी तरह की दुर्घटना होती है तो इसका पता भी कंट्रोल रूम को लग जाएगा और हाईवे अथॉरिटी वाहन की लोकेशन ट्रैक कर लेगी और जरूरी मदद पहुंचाएगी।
क्या सच में काम करता है यह एप...?
अब यह यह एप कैसा काम करता है, क्या जरूरत पड़ने पर सच में मदद तुरंत पहुंचती है, एप काम करता है भी या नहीं... इन सवालों के जवाब जानने के लिए अमर उजाला की टीम यमुना एक्सप्रेसवे पर पहुंची। यहां पहुंचकर हमारी रिपोर्टर ने अपने फोन में हाईवे साथी एप इंस्टॉल किया। इसके बाद उन्होंने एप में अपना फोन नंबर डाला। लेकिन इसके बाद वेरिफाई करने पर एप नेटवर्क या सिग्नल में दिक्कत का मैसेज दिखाने लगा। एक बार फिर से नंबर रजिस्टर करने की कोशिश की गई लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात ही रहा।
इसके बाद अमर उजाला की टीम इस उम्मीद में वहां से करीब एक-डेढ़ किलोमीटर आगे पहुंची कि शायद पहले वाली जगह वास्तव में नेटवर्क की कोई दिक्कत हो। यहां पहुंचकर एक बार फिर नंबर लिख कर वेरिफाई करने की कोशिश की गई। लेकिन फिर वही मैसेज मिला। जिसमें लिखा था, आपके इंटरनेट कनेक्शन के साथ कुछ दिक्कत है। कृपया कुछ देर बाद कोशिश करें। जबकि, बाकी एप के साथ इंटरनेट एकदम सही काम कर रहा था। अब सवाल यह है कि अगर एप काम ही नहीं कर रहा है तो इसे डाउनलोड ही क्यों किया जाए?