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...और जब मोदी का भाषण छोड़ बीच में ही उठकर जाने लगे लोग

Wed, 06 Apr 2016 12:24 PM IST
हरेन्द्र सिंह मोरल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंच पर भाषण देते मोदी और मैदान से निकलते लोग - फोटो : amar ujala
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मौका था सेक्टर 62 में प्रधानमंत्री मोदी के महत्वाकांक्षी स्टैंडअप इंडिया के शुभारंभ का। कार्यक्रम थोड़ा लेट था लेकिन हमें पहुंचने की थोड़ा जल्दी, इसलिए दोपहर दो बजे ही आयोजन स्‍थल के लिए निकल लिए। लेकिन देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचना इतना आसान भी नहीं था, जिस चौराहे को भी पार करते आगे पुलिस और मुस्तैद सुरक्षाबलों का घेरा लोगों की राह रोकने को तैयार मिलता। 
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इस छोटे से सफर में एक बात हर बार दिमाग में आती कि आम आदमी से इतने दूर क्यों हैं हमारे प्रधानमंत्री। खैर पैदल ही कई किलोमीटर का लंबा सफर तय कर हम जैसे तैसे नेशनल हाइवे के निकट आयोजन स्‍थल तक पहुंचे। 

विशालकाय मंच पर मोदी अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ विराजमान थे और सामने धूल भरे मैदान में लोग उनकी झलक पाने के लिए उतावले। मंच से पहले भाषणों और घोषणाओं का लंबा दौर चला, लेकिन जैसे ही मोदी बोलने के लिए खड़े हुए मंच के सामने का नजारा तुरंत बदलने लगा। 
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उनके भाषण के बीच में ही लोगों ने उठकर चलना शुरू कर दिया, इससे पहले कि मोदी भाषण समाप्त करते आधे से ज्यादा लोग अपनी कुर्सियां छोड़कर जा चुके थे। अमूमन ऐसा कम ही होता है कि शब्दों के जादूगर मोदी मंच पर बोल रहे हों और लोग बीच में ही छोड़कर जाने लगें। 

बसों में भरकर लाए थे माइक्रोफाइनेंस कंपनी के लोग

लोगों ने बताया कि लोन दिलाने के नाम पर प्राइवेट कंपनी वाले लाए थे - फोटो : amar ujala
लोगों की यह बेरुखी थोड़ी अटपटी लगी तो एक दो लोगों को रोककर उनसे बात की। पता चला कि उन्हें तो यहां लोन दिलाने के नाम पर लाया गया था, लेकिन यहां आकर मायूसी ही हाथ लगी। बागपत के खेकड़ा से अपने साथियों के साथ आए याकूब ने बताया कि उन्हें एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी का एजेंट यह कहकर अपने साथ लाया था कि वहां प्रधानमंत्री मोदी के हाथों लोन मिलेगा। 

याकूब के साथ आए नफीस खेकड़ा में ही रिक्‍शा चलाते हैं उनसे भी कुछ ऐसा ही वादा किया गया था। सिकंदराबाद के शेरपुर गांव से आए दीन मोहम्मद सिलाई का काम करते हैं उन्हें भी एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी के एजेंट की ओर से लोन दिलाने का वादा किया गया था। वह भी दुकान बंद कर सुबह ही नोएडा पहुंच गए थे। 

थोड़ा तफसील से पूछताछ की तो पता चला कि मोदी के कार्यक्रम में पहुंची आधे से ज्यादा भीड़ शेटिंग नाम की माइक्रोफाइनेंस कंपनी की ओर से बसों में भरकर लाई गई थी। मोदी के भाषण खत्म होने तक भी जब लोगों को लोन के संबंध में कोई पुख्ता आश्वासन नहीं मिलता दिखा तो उनका सब्र जवाब दे गया और वो भाषण के बीच में से ही निकलने लगे। 

दिल्‍ली के गुलाबी बाग एरिया से गोपाल कुमार अपने परिवार के साथ लोन की आस में पहुंचे थे। उनसे भी शेटिंग कंपनी के एजेंट ने एक लाख रुपये का लोन दिलाने का वादा किया था लेकिन यहां आकर वह भी कुढ़ते दिखे। शेटिंग कंपनी के एक अधिकारी से बात की तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम लोग महिलाओं और छोटे कामगारों को अपना काम शुरू करने के लिए 30-30 हजार तक का लोन देते हैं। 

अब कंपनी एमएफआई से बैंक की शक्ल अख्तियार करना चाहती है इसलिए हम अपने सभी सदस्यों (जिन्हें लोन दिया गया) को यहां लेकर आए हैं ताकि अपना काम प्रधानमंत्री जी को दिखाया जा सके। 

टूटा ई रिक्‍शा का सपना तो आंखों से बहने लगे आंसू

बीएमसी के अधिकारी को घेरकर बैठे ई रिक्‍शा के पात्र आवेदक - फोटो : amar ujala
लोन की तरह ही काफी संख्या में लोग ई रिक्‍शा पाने की उम्‍मीद में भी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचे थे। पीएम मोदी को यहां 5100 ई रिक्‍शा का वितरण करना था। लेकिन ई रिक्‍शा के लिए पहुंचे लोगों को भी निराशा ही हाथ लगी। 

कार्यक्रम के बाद जैसे ही पात्र लोग ई रिक्‍शा लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें पता चला कि अभी किसी को ई रिक्‍शा का वितरण नहीं किया जाएगा। इसको लेकर कुछ लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा। नोएडा के सेक्‍टर 10 से आए जय कुमार, लक्ष्मी देवी और कुंती ने बताया कि उनसे छह महीने पहले ई रिक्‍शा देने के लिए फार्म भरवाए गए थे। 

अब देने का मौका आया तो यह कहकर टरकाया जा रहा है कि दो दिन बाद मिलेंगे। फरुखाबाद निवासी विकलांग कौशल्या देवी अपने पति के साथ ई रिक्‍शा लेने की उम्‍मीद से वहां पहुंची थी। 

कौशल्या ने बताया कि काफी दिन पहले उनसे ई रिक्‍शा के लिए फार्म भरवाया गया था लेकिन यहां पहुंचे तो पता चला उनका नाम काटकर किसी और का रख दिया गया है। बुलंदशहर निवासी विकलांग लोकमन की आंखों में आंसू थे। 

वह इस बात को लेकर नाराज थे कि उनका नाम विकलांग कोटे में रखवाया गया था लेकिन ई रिक्‍शा पाने वालों की सूची से उसे हटा दिया गया। हालांकि अधिकारियों के सामने कुछ लोग अपने परिवार के साथ ई रिक्‍शा लेकर वहां से निकले थे, लेकिन जब उनसे बात की गई तो उन्होंने रोष भरे शब्दों में बताया कि उन्हें फिलहाल दिखाने के लिए ई रिक्‍शा दिया गया है, ले जाने के लिए नहीं।
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फ्री में नहीं मिलेगा ई रिक्‍शा

ई रिक्‍शा न मिलने पर मायूस बैठी पात्र महिलाएं - फोटो : amar ujala
कार्यक्रम के दौरान इस बात का भी दावा किया जा रहा था कि लोगों को मुफ्त में ई रिक्‍शा बांटे जाएंगे, लेकिन हकीकत कुछ और ही दिखी। असल में ई रिक्‍शा के लिए पात्र लोगों को इसके लिए 1 लाख 33 हजार रुपये की रकम चुकानी होगी। हालांकि इसमें ई-रिक्‍शा की कीमत 77 हजार ही है लेकिन टैक्स, इंश्योरेंस और अन्य खर्चे मिलाकर यह 1 लाख 33 हजार में पड़ेगा। 

ई रिक्‍शा के वितरण का जिम्मा भारतीय माइक्रो क्रेडिट नाम की माइक्रो फाइनेंस कंपनी के पास था। कंपनी के अधिकारी विजय पांडे ने बताया कि हमने नोएडा, गाजियाबाद, गुडगांव, साहिबाबाद और दिल्‍ली से कुल 5100 लोगों को चयन किया गया है, जिन्हें बैंक के माध्यम से लोन कराकर यह ई रिक्‍शा दिलवाए जाएंगे। उसके बाद रोजाना किश्त के रूप में उन्हें लोन की रकम का भुगतान करना होगा। 

मार्के‌टिंग का जरिया बना पीएम का मंच
कार्यक्रम तो था मांदी के स्टैंडअप इंडिया का लेकिन इस बहाने निजी कंपनियों ने अपना जमकर प्रचार किया। कुछ कंपनियां तो मोदी के मंच से ही अपना प्रचार करवाने में सफल रही। 

मसलन कैब सेवा उपलब्‍ध करवाने वाली प्रमुख कंपनी ओला का तो पीएम मोदी ने अपने भाषण में भी कई बार जिक्र किया। अन्य निजी कंपनियां भी प्रचार में पीछे नहीं रही। लगभग सभी ई-रिक्‍शाओं पर सी न किसी कंपनी का लोगो दिखा। जिनमें भारतीय माइक्रो क्रेडिट (BMC), ओला, रिलायंस, एसबीआई, फ्रीचार्ज आदि की ओर से स्टाल भी लगाए गए थे। 
 
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