कलकत्ता हाईकोर्ट 14 मई को होने वाले पंचायत चुनावों के भविष्य पर बृहस्पतिवार को फैसला सुनाएगा। कांग्रेस की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की एक खंडपीठ ने मंगलवार को सुनवाई के बाद बृहस्पतिवार को फैसला सुनाने का एलान किया था।
याचिका में मतदान के दिन सुरक्षा का समुचित इंतजाम नहीं होने की दलील देते हुए चुनाव रद्द करने की अपील की गई है। अदालत ने राज्य सरकार व राज्य चुनाव आयोग की ओर से सुरक्षा की स्थिति पर सौंपी गई रिपोर्ट पर भी विचार किया। इससे पहले मंगलवार को एक अन्य खंडपीठ ने माकपा की ओर से ई-मेल के जरिये भेजे गए नामांकन पत्रों को स्वीकार करने का निर्देश दिया था। नतीजतन लाखों मत पत्रों को नए सिरे से छापना होगा।
मंगलवार की सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्त ने कहा कि सरकार के पास मतदान के दिन तैनाती के लिए 71,500 सशस्त्र जवानों के अलावा 80 हजार सिविक वालंटियर मौजूद हैं।
दत्त ने अदालत में दलील दी कि राज्य में पांच सौ इंस्पेक्टर, 10 हजार सब-इंस्पेक्टर और 61 हजार कांस्टेबल, होम गार्ड और नेशनल वालंटियर फोर्स (एनवीएफ) के अलावा 80 हजार सिविक वालंटियर हैं। ऐसे में मतदान केंद्रों में सुरक्षा मुहैया कराना कोई मुश्किल नहीं होगा।
राज्य चुनाव आयोग के वकील शक्तिनाथ मुखर्जी ने कहा कि आयोग की निगाह में एक दिन मतदान कराने के लिए इतने सुरक्षा बल पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 के चुनावों में राज्य में 35 हजार सशस्त्र जवान थे। इस बार यह तादाद उसके मुकाबले बहुत ज्यादा है।