दिल्ली हाईकोर्ट ने काम के दौरान एक व्यक्ति के एचआईवी वायरस के संक्रमण की चपेट में आने की वजहों को जानने के लिए 8 अथॉरिटी से तीन हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि 'केन्द्र और राज्य सरकार एचआईवी संक्रमित उस शख्स को जिसने नौकरी गंवा दी हो उसके इलाज में पूरी मदद करे।'
कोर्ट ने जिन 8 अथॉरिटी से जवाब मांगा है उनमें मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन, दिल्ली एड्स कंट्रोल सोसायटी, दिल्ली की एनसीटी सरकार, बीके इंटप्राइजज और एक सरकारी संस्थान से जवाब मांगा है।
बता दें कि याचिकाकर्ता के वकील अशोक अग्रवाल ने कोर्ट में पीआईएल दायर की है जिसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता 2011 से सरकारी अस्पताल की एक लैबरेटरी में काम कर रहा है काम के दौरान एचआईवी वायरस संक्रमित सुईयां चुभ गई। जिसके बाद संस्थान ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यही नहीं अस्पताल एड्स से बचाव के लिए उन्हें पोस्ट एक्स्पोजर प्रॉफैलेक्सिस (पीईपी) भी नहीं दिया।
वकील ने बताया 'पांच साल बाद याचिकाकर्ता को पता चला है कि वह एचआईवी से पीड़ित है। इसके बाद अस्पताल ने उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया।'