बॉम्बे हाई कोर्ट ने आत्मरक्षा को आधार मानते हुए हत्या के मामले में एक व्यक्ति की सजा को उम्रकैद से घटाकर कम कर दिया। हत्या का यह मामला मुंबई के नागपाड़ में 2001 का है। 2013 में मुंबई की सत्र अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हत्या के इस मामले में दोषी व्यक्ति पहले ही सात साल की सजा काट चुका है।
सत्र अदालत के इस फैसले को उम्रकैद की सजा काट रहे व्यक्ति ने बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट में पेश में अपनी दलील में दोषी ने कहा कि उसने आत्मरक्षा में अपने दोस्त को चाकू मारा था। दोषी ने दलील दी कि उसे उसके दोस्त ने अप्राकृतिक संबंध बनाने के लिए न सिर्फ मजबूर किया बल्कि उस पर जानलेवा हमला भी किया।
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सारंग कोतवाल की दो सदस्यीय हाई कोर्ट की बेंच ने हत्या के दोषी की इस दलील को सही माना और उम्रकैद की उसकी सजा घटा दी। साथ ही बेंच ने दूसरे पक्ष के वकील की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि दोषी ने अपनेशरीर पर खुद घाव के निशान बनाए थे।