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मानसिक बीमारी के आधार पर छात्रा ने मांगी गर्भपात की अनुमति, समिति करेगी जांच

Wed, 27 Mar 2019 08:29 PM IST
Gaurav Pandey भाषा, मुंबई
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बॉम्बे उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
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बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुधवार को जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के संकाय प्रमुख की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया जो उस 20 वर्षीय छात्रा की मानसिक स्थिति की जांच करेगी जिसने अदालत से उसे गर्भपात की अनुमति देने की मांग की है। 

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इस छात्रा का गर्भ अब 23वें सप्ताह का है और आपसी सहमति से बने संबंधों के बाद वह गर्भवती हो गई। उसने अदालत से कहा कि गर्भस्थ शिशु में कोई बीमारी नहीं है और उसका गर्भ उसके स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डाल रहा है। लेकिन गर्भकाल के पूरा होने पर उसकी दिमागी सेहत पर असर पड़ सकता है। 

वादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दायर अर्जी में कुछ निजी चिकित्सकों की रिपोर्ट दाखिल करते हुये कहा है कि उसे कुछ मानसिक दिक्कत है और उसकी मानसिक अवस्था नाजुक है। उसने यह भी कहा कि रजामंदी से बने संबंधों में भी वह ठीक से सहमति देने में भी सक्षम नहीं है। 
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बता दें कि गर्भपात संबंधी कानून 20 सप्ताह से अधिक के गर्भस्थ शिशु को गिराने की अनुमति नहीं देता।

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