नंबर के जरिए कोई भी आप से जुड़ी कोई जानकारी नहीं हासिल कर सकता है। आपके और सरकार के सिवा अगर किसी और के पास आपका आधार नंबर और नाम या फिंगरप्रिंट है, तो वो आधार के डेटाबेस से उसकी तस्दीक भर कर सकता है। सरकार के मुताबिक ऐसी बात पूछे जाने पर सिस्टम उसके जवाब में हां या ना ही कहेगा कि ये आंकड़े मिलते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो थर्ड पार्टी यानी आपके और सरकार के सिवा किसी तीसरे के पास आपका आधार नंबर और नाम है, तो UIDAI (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) सिर्फ उसे सही या गलत बता सकती है।
केवाईसी की जरूरत
हालांकि, आधार के जरिए 'ऑथेंटिफिकेशन प्लस' नाम की एक सेवा भी दी जाती है। इसमें किसी शख्स का नाम, उम्र और पते की जानकारी दर्ज की जाती है। इस जानकारी को कोई सेवा प्रदाता यानी सेवा देने वाली कंपनी या पड़ताल करने वाली एजेंसी हासिल कर सकती है। असल में कानूनन बैंकिंग सेवाएं या कई और सेवाएं देने वाली कंपनियों को केवाईसी (KYC) यानी अपने ग्राहक को जानने की बाध्यता है। कंपनियों को वेरिफिकेशन के लिए किसी शख्स के आधार के जरिए जानकारी हासिल करना आसान हो गया है, क्योंकि उनके लिए अपने ग्राहक का वेरिफिकेशन करना जरूरी है। UIDAI ने आधार के जरिए e-KYC यानी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वेरिफिकेशन की सुविधा देनी भी शुरू की है।
डिजिटल वेरिफिकेशन से तैयार होता डेटाबेस
इसकी वेबसाइट के मुताबिक, ये सेवा कारोबार जगत के लिए है, जिसमें बिना कागजात की पड़ताल के, फौरन किसी शख्स का वेरिफिकेशन हो सकता है। मसलन, कोई मोबाइल कंपनी इस जानकारी को तुरंत लेकर अपने ग्राहक के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकती है। जबकि पहले कागजात के मिलान की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब आपके आधार नंबर और फिंगरप्रिंट से UIDAI के डेटाबेस से आपके बारे में दूसरी जानकारियां फौरन मिल सकती हैं। दूसरी निजी कंपनियां आधार से मिली जानकारी के आधार पर खुद का डेटाबेस भी तैयार कर सकती हैं। आपकी पहचान को दूसरी जानकारियों से जोड़ सकती हैं।
UIDAI का डेटाबेस
यानी कोई भी कंपनी आपके आधार से मिली जानकारी को आपकी दूसरी जानकारियों जैसे उम्र और पते के साथ जोड़कर, कर्मचारी का वेरिफिकेशन कर सकती हैं। या फिर ई-कॉमर्स कंपनियों पर आप जो लेन-देन करते हैं, उससे आपका विस्तृत प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। ये डेटाबेस UIDAI के नियंत्रण से बाहर होगा। मगर आधार नंबर के जरिए इसका मिलान किया जा सकता है। डिजिटल अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने वाले निखिल पाहवा कहते हैं, "आधार नंबर के जरिए और जानकारी हासिल की जा सकती है।" निखिल आधार योजना के मुखर विरोधी हैं। पाहवा एक मिसाल देते हैं। वो कहते हैं कि दिसंबर में UIDAI ने एक नंबर ट्वीट किया।
पैसे ट्रांसफर का फर्जीवाड़ा
इस नंबर पर जब आप कोई आधार नंबर एसएमएस के तौर पर भेजते हैं, तो जिस बैंक खाते से वो आधार नंबर जुड़ा होता है, उसके बैंक का नाम आ जाता है। बैंक खाते का नंबर हालांकि नहीं आता। निखिल पाहवा कहते हैं, "इस नंबर के ट्वीट होने के बाद कई लोगों के पास फोन कॉल आने लगे कि वो किसी बैंक के कर्मचारी हैं। फिर वो ये कहते कि उन्होंने एक ओटीपी भेजा है। कई लोगों से ओटीपी पूछकर उन्होंने लोगों के पैसे अपने खाते में ट्रांसफर करने का फर्जीवाड़ा किया गया है।" अगर किसी के पास मेरा आधा-अधूरा आधार नंबर है, तो क्या तब भी वो इससे मेरी जानकारी हासिल कर सकते हैं?
जानकारी का लीक होना
ये इस बात पर निर्भर करता है कि किसी के हाथ आपके आधार के कितने नंबर लगे हैं। वो सिर्फ कुछ अंकों से तो आपकी जानकारी हासिल नहीं कर सकते। मगर वो ये कोशिश जरूर कर सकते हैं कि उनमें दूसरे नंबर जोड़ें, जो शायद आपके आधार नंबर से मैच करें। अगर ऐसा हुआ, तो फिर वो आपके आधार में दर्ज जानकारी पा सकते हैं। अगर किसी के पास मेरा आधार नंबर है, या ये लीक हो जाता है, तो क्या इसका बेजा इस्तेमाल हो सकता है? और हां, तो कैसे? अगर सिर्फ आधार नंबर लीक होता है, तो इसका दुरुपयोग नहीं हो सकता।
बायोमेट्रिक डेटा
लेकिन फिलहाल मोबाइल कंपनियां और आगे चलकर बैंक भी आपके बायोमेट्रिक डेटा का आधार नंबर से मिलान कर सकते हैं। हालांकि अगर ई-कॉमर्स कंपनियों के पास आपसे जुड़ी जानकारियों का डेटाबेस है और उन्हें आधार नंबर भी मिल जाता है। फिर ये जानकारी लीक हो जाती है, तो आपके लिए दिक्कत होगी। इससे आपकी निजता को खतरा है। आप से जुड़ी जानकारी के आधार पर नागरिकों का बड़ा प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। फिर इसे दूसरे लोगों को बेचा जा सकता है। या फिर नागरिकों की जानकारी उन अपराधियों के हाथ लग सकती है, जो अमीर लोगों को निशाना बनाने की फिराक में हैं।
कई सेवाओं से आधार के जुड़ने पर खतरा
किसी भी खराब सिस्टम का दुरुपयोग हो सकता है। जैसे कि पहचान के लिए आपके आधार नंबर की फोटोकॉपी मांगने वाले किसी भी सर्विस प्रोवाइडर से आपकी जानकारी लीक हो सकती है। निखिल पाहवा कहते हैं, "आधार नंबर आपकी स्थाई पहचान है। इसे जैसे-जैसे दूसरी सेवाओं से जोड़ा जा रहा है, उससे इस पर खतरा और भी बढ़ रहा है।" "एक जगह से भी डेटा चोरी हुआ, तो आपकी पहचान में सेंध लगेगी। क्योंकि किसी के हाथ आपका आधार नंबर लगा, तो उसे फिर आपके फिंगरप्रिंट या ओटीपी की ही जरूरत होगी। इनके जरिए वो आपके बैंक खाते या दूसरी निजी जानकारियों को हासिल कर लेगा।" हालांकि सरकार ने हमेशा ये कहा है कि किसी भी शख्स के आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक डेटा इनक्रिप्टेड है और बेहद सुरक्षित तरीके से रखा गया है। इसे लीक करने या चुराने वाले किसी भी शख्स को जुर्माना देने के साथ जेल भी भेजा जा सकता है।
आधार नंबर को ऑनलाइन कंपनियों और रिटेल स्टोर से जोड़ना कितना सुरक्षित?
धीरे-धीरे तमाम ऑनलाइन कंपनियां आसानी से आपकी पहचान के लिए आधार नंबर मांग रही हैं। खतरा इस बात से है कि ये तमाम कंपनियां जब आपके आधार नंबर की बुनियाद पर आपसे जुड़ी जानकारियों का नया डेटाबेस तैयार कर लेंगी। अगर इन कंपनियों के पास दर्ज आपकी ये जानकारी लीक होगी, तो दूसरी कंपनियां बिना आपके आधार नंबर के ही, आपके मोबाइल नंबर से आपकी जानकारी को जोड़कर आपका प्रोफाइल तैयार कर सकती हैं। जैसे कि टैक्सी सेवाएं देने वाली कंपनियां, या मोबाइल और बिजली कंपनियां।