अगर आप गंगा में डुबकी लगाने जा रहे हैं तो एक बार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की वेबसाइट पर जाकर इसकी पुष्टि कर लें कि वह जगह नहाने लायक है या नहीं। सीपीसीबी के मुताबिक, गंगोत्री से हरिद्वार तक ही गंगा का पानी नहाने योग्य है। इसके आगे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में एक या दो स्थानों को छोड़कर कहीं भी गंगा का पानी नहाने लायक नहीं बचा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद अब सिगरेट के पैकेट पर दी जाने वाली चेतावनी की तरह सीपीसीबी की वेबसाइट के जरिए लोगों को ऑनलाइन ही आगाह किया जा रहा है कि गंगा में किस-किस स्थान पर पानी डुबकी लगाने योग्य नहीं है। जल्द ही मैदानों में इसको लेकर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर गंगा नहाने योग्य नहीं
सीपीसीबी के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर की ओर से दी जा रही जानकारी चिंताजनक है। उत्तराखंड में अलकनंदा से हरिद्वार तक ही पानी नहाने लायक है। वहीं, हरिद्वार से नीचे आते ही उत्तर प्रदेश में गढ़-मुक्तेश्वर, अलीगढ़, कन्नौज, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी जैसी जगहों पर कहीं भी गंगा का पानी नहाने लायक नहीं है। सभी जगह लाल श्रेणी प्रदर्शित की गई है।
ऐसे हासिल करें गंगा के प्रदूषण की जानकारी
1
सर्च इंजन पर सीपीसीबी के साथ सूटेबिलिटी ऑफ रिवर गंगा वाटर की खोज करें या फिर सीपीसीबी की वेबसाइट पर जाकर ई-गवर्नेंस कॉलम में आपको यह सॉफ्टवेयर मौजूद मिलेगा। इसमें गंगा क्षेत्र का सेटेलाइट नक्शा प्रदर्शित किया गया है। गंगा के हर प्रमुख बिंदु पर लाल यानी अनफिट और हरा यानी फिट के निशान को प्रदर्शित किया गया है। इसे देखकर यह आसानी से समझा जा सकता है कि पानी नहाने लायक है या नहीं।
इन जगहों पर है गंगा नहाने लायक
गंगोत्री, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, मध्य गंगा बिजनौर, बृजघाट-गढ़मुक्तेश्वर, आरा-छपरा रोड
यदि यह हो मात्रा तो पानी पीने योग्य
सीपीसीबी के मुताबिक, यदि घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा 6 मिलीग्राम प्रति लीटर, जैव रसायनिक ऑक्सीजन मांग 2 मिली ग्राम प्रति लीटर, 100 मिली लीटर में कुल कॉलीफॉर्म 5 हजार मोस्ट प्रोबेबल नंबर (एमपीएन) से अधिक न हो और पीएच की रेंज 6.5 से 8.5 के बीच हो तो पानी पीने योग्य हो सकता है। फिलहाल सीपीसीबी के नक्शे में हरिद्वार तक जो पानी नहाने योग्य बताया गया है यदि उसे शोधित कर इस मात्रा में पहुंचाया जाए तो पानी पीने लायक बनेगा।
सीवेज और नाले हैं सबसे बड़ी समस्या
सीपीसीबी के पूर्व सदस्य सचिव और गंगा मामले में विशेषज्ञ समिति में शामिल एमबी अकोलकर ने बताया कि यह सच है कि कुछ गिने-चुने स्थानों को छोड़कर गंगा कहीं नहाने लायक नहीं हैं। गंगा की सबसे बड़ी समस्या सीवेज वाले नाले हैं जो बिना शोधित हुए गंगा में गिर रहे हैं। यूपी में यह समस्या सबसे अधिक है।