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Kerala: 'हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं', हेमा समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने पर केरल सरकार का बयान

Sat, 07 Dec 2024 03:13 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोझिकोड

सार

राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार फिल्म नीति समेत हेमा समिति की सिफारिशों को लागू कर रही है। सरकार एक फिल्म नीति का मसौदा तैयार करेगी। उन्होंने आगे बताया कि सरकार और उनके अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई कानून के दायरे में रही है।
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साजी चेरियन - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल के संस्कृति मंत्री साजी चेरियन ने शनिवार को बताया कि राज्य सरकार हेमा समिति की सिफारिशों को लागू कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हेमा समिति की रिपोर्ट में छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। बता दें कि हेमा समिति की रिपोर्ट में मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले चौंकाने वाले उत्पीड़न और यौन शोषण को उजागर किया गया था। 
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मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन किया है। केवल उन हिस्सों को छोड़ दिया गया है, जिन्हें राज्य सूचना आयोग ने जारी न करने की सिफारिश की थी। राज्य मंत्री साजी चेरियन ने कहा, "यह मामला फिलहाल हाईकोरिट के सामने है। अगर अदालत या सूचना आयोग इन हिस्सों को सार्वजनिक करने का निर्देश देता है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। हमने रिपोर्ट के संबंध में राज्य सूचना आयोग द्वारा निर्देशित सभी जानकारी का खुलासा किया है। सब कुछ पारदर्शी है।"

राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार फिल्म नीति समेत हेमा समिति की सिफारिशों को लागू कर रही है। सरकार एक फिल्म नीति का मसौदा तैयार करेगी। उन्होंने आगे बताया, "सरकार और उनके अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई कानून के दायरे में रही है। रिपोर्ट के किसी भी भाग के जारी होने से हमें डर नहीं है।"
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क्या है मामला?
दरअसल मामला 14 फरवरी, 2017 का है। जब एक लीडिंग मलयालम अभिनेत्री के साथ उन्हीं की कार में यौन उत्पीड़न किया गया था। वो उस वक्त अपने घर से कोच्चि जा रही थीं। इस दौरान कुछ लड़कों के एक समूह ने उन्हें अगवा कर लिया था और यौन उत्पीड़न किया। इस घटना की खबर आग की तरह पूरे राज्य में फैल गई थी। इससे लोग न केवल परेशान थे बल्कि काफी गुस्से में दिखाई दिए। आरोपियों का मकसद पीड़िता को ब्लैकमेल करना था। हालांकि, 10 आरोपियों में से छह को कुछ दिनों के अंदर ही गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि, पॉपुलर एक्टर दिलीप को जुलाई में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की सुनवाई साल 2020 से चल रही है। 

घटना के बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के ही कई लोगों ने इस मामले पर आवाज उठाई। वहीं, महिलाओं के साथ होने वाले भेदभावपूर्ण व्यवहार पर सबकी नजर पड़ी, जिसके बाद गठित वूमन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) ने मुख्यमंत्री को एक याचिका दी थी। इस दौरान इंडस्ट्री में जेंडर इश्यू पर जांच की मांग की गई थी। घटना के बाद पांच महीने का वक्त बीत चुका था. फिर जुलाई 2017 में राज्य सरकार ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न और जेंडर इनइक्वालिटी के मुद्दों पर विचार करने के लिए तीन सदस्यों की कमेटी का गठन किया। यह कमेटी रिटायर्ड केरल हाईकोर्ट जस्टिस के हेमा की अध्यक्षता में गठित हुई।

क्या है हेमा समिति रिपोर्ट?
इस समिति के तहत आयोग ने इंडस्ट्री में कई महिला प्रोफेशनल से बातचीत की। इस दौरान यौन उत्पीड़न, मजदूरी पर कीमत और काम से ब्लैकलिस्टिंग करने समेत दूसरे मुद्दों के बारे में रिकॉर्ड दर्ज किए गए। साल 2019, दिसंबर को मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को 300 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें इन सभी मुद्दों को सपोर्ट करने के लिए डॉक्यूमेंट्स, ऑडियो और वीडियो के एविडेंस शामिल थे। आयोग ने इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच के मुद्दों को उठाया, जबकि फिल्म सेट पर शराब और ड्रग्स का इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी रिपोर्ट की गई थी। इस पर समिति ने रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों की जांच के लिए एक न्यायाधिकरण के गठन की सिफारिश की।
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