केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह भारत में चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका की निजी संस्था की सहायता ले रही है। केंद्र सरकार के मुताबिक यह संस्था 99 देशों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के अपलोड होने की बाबत तकनीकी जानकारियां देती है।
सर्वोच्च अदालत में दायर स्थिति रिपोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि अमेरिका की ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन’ (एनसीएमईसी) संस्था लापता और पीड़ित बच्चों के बारे में सूचना के एक स्रोत के तौर पर काम करती है। यह एक निजी, गैर लाभकारी संगठन है जो अमेरिका तथा 99 अन्य देशों की केंद्रीय कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों को नि:शुल्क जानकारियां उपलब्ध कराता है।
सरकार ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष बताया कि एनसीएमईसी द्वारा दी गई सूचना के मुताबिक देश में कानून प्रवर्तन एजेंसी के साथ सुरक्षित लिंक बनाने की कोशिश हो रही है। स्थिति रिपोर्ट में देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बताया गया है।
गौरतलब है कि हाल ही में गृह मंत्रालय को दी एक सूचना में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटी) ने बताया कि एनसीएमईसी ने सूचना दी है कि ऐसी खबरें हैं कि भारतीय क्षेत्र से चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े काफी वीडियो अपलोड किए गए हैं।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने भी 14 जुलाई को पीठ को बताया था कि केंद्र सरकार ने बीते महीने चाइल्ड पोर्नोग्राफी वाली 3,522 वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया है। यही नहीं सीबीएसई को भी ऐसी साइटों तक बच्चों की पहुंच रोकने के लिए स्कूलों में जैमर लगाने पर विचार करने के लिए कहा गया है।